तूफान Montha ने पूर्वी भारत में फिर से खतरा बढ़ा दिया है। बंगाल की खाड़ी में बन रहा यह सिस्टम अब तेज़ी से बढ़ रहा है और मौसम विभाग ने सतर्कता जारी की है।पूर्वी भारत की जिन्दगी फिर से एक बड़े मौसमीय खतरे के सामने है। बंगाल की खाड़ी में चल रहे निम्नचापीय सिस्टम ने तेज़ी से विकास पाई है और अब इसे तूफान ‘मोंथा’ के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी बीच, आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने अधिकारियों को प्रत्येक घंटे बुलेटिन जारी करने का आदेश दिया है जबकि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पूर्ण केंद्रीय समर्थन का आश्वासन दिया है। इस लेख में हम देखेंगे कि स्थिति क्या है, सरकारों ने क्या तैयारी की है, जनता को क्या करना चाहिए, तथा आगे क्या चुनौतियाँ सामने हो सकती हैं।
1. तूफान Montha का मिजाज और ट्रैक
मौसम विभागों की ताज़ा जानकारी के अनुसार, मोंथा अभी पश्चिम-दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में है और अनुमान है कि यह उत्तर-उत्तरी-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए आंध्र-प्रदेश के तटीय इलाके में 28 अक्टूबर शाम या रात तक लग सकते हैं। इसकी गति, तीरछाया, बारिश और समुद्री उठान बेहद गंभीर हो सकती है।
तटीय जिलों में पहले ही हल्की हवाएँ और बारिश शुरू हो चुकी हैं। लेकिन इस तरह की शुरुआत कभी भी धोखे में डाल सकती है — असली झटका तूफान के चरम में आ सकता है। इसी कारण मुख्यमंत्री ने प्रत्येक घंटे बुलेटिन जारी करने का निर्देश दिया है ताकि परिस्थितियों में अचानक बदलाव को समय-समय पर जनता तक पहुँचाया जा सके।
2. राज्य सरकार की तैयारियाँ
चुनौती को लेकर आंध्र-प्रदेश सरकार ने कई तरह की सक्रिय तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री नायडू ने शीघ्र समीक्षा बैठक बुलाई जिसमें राज्य रेयल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) के माध्यम से सभी विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “कोई जान नहीं जाए” इस लक्ष्य को लेकर काम किया जाना चाहिए।
प्रमुख बिंदु:

- 2,707 गाँव/वार्ड सचिवालयों को विशेष चेतावनी सूची में रखा गया है।
- 110 मंडलों में 3,211 जनरेटर मौजूद रखे गए हैं ताकि विद्युत कटौती के दौरान आपात सेवाएँ चलती रहें।
- राहत केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है जहाँ आवश्यकतानुसार लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकेगा।
- राहत शिविरों में प्रति व्यक्ति 25 किलो चावल वितरण का प्रावधान है।
- National Disaster Response Force (NDRF) व State Disaster Response Force (SDRF) की टीमें तैयार हैं; साथ में अग्निशमन, स्वास्थ्य, विद्युत व सड़क विभाग सक्रिय हैं।
- पशुपालन व कृषि के लिए भी तैयारियाँ हो रही हैं — जिबिलों (tarpaulins), भारी उपकरण (JCBs, पावरसॉज़) व ड्रेन् सफाई की मशीनें तैनात की गई हैं।
- स्वास्थ्य-सेवा-मंडलों को विशेष निर्देश दिए गए हैं: गर्भवती महिलाएं, नवजात, पुराने लोग प्राथमिकता पर; एम्बुलेंस (108, 104) सक्रिय; सप्लाई में एंटी-स्नेक वैनम व एंटी-रेबीज़ उपलब्ध।
- प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ों की शाखाओं की छंटनी, जलस्तर पर निगरानी, बांधों/तालाबों का रीयल-टाइम निरीक्षण आदि।
- अधिकारियों व मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश: यदि लापरवाही पाई गई तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
इन उपायों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ‘देखे-भाले’ मोड में काम कर रही है — यानी पूर्व सूचना, निरंतर निगरानी व समय से पहले राहत व बचाव व्यवस्था। https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/chief-minister-chandrababu-orders-hourly-bulletins-on-cyclone-montha-pm-modi-assures-full-central-support/article70208110.ece
3. केंद्र सरकार की भागीदारी
तूफान Montha चुनौती इतनी बड़ी है कि राज्य-सरकार अकेले निपट नहीं सकती। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री नायडू से संपर्क किया और सुनिश्चित किया कि केंद्र पूरा सहयोग देगा। इस प्रकार:
- केंद्र द्वारा NDRF व अन्य केंद्रीय राहत-बल तुरंत उपलब्ध होंगे।
- आपात निधियों व राहत पैकेज की व्यवस्था है।
- बड़े पैमाने पर रेल-सड़क व संचार इंफ्रास्ट्रक्चर की बहाली के लिए योजनाएँ तैयार हैं।
- मौसम-सैटेलाइट व तकनीकी निगरानी-संसाधन केंद्र द्वारा नियंत्रित होंगे।
इस तरह, राज्य एवं केंद्र का समन्वय अधिक-से-अधिक प्रभावी होने का संकेत दे रहा है — जो बड़े आपदाओं में जीवन-रक्षा के लिए अहम होता है।

4. ‘हर घंटे बुलेटिन’ क्यों महत्वपूर्ण?
तूफान की प्रकृति अत्यधिक अनिश्चित-प्रवण होती है। दिशानिर्देश, गति, हवाएँ, समुद्री उठान और वर्षा में अचानक बदलाव हो सकते हैं। इसी कारण हर घंटे बुलेटिन जारी करना – खासकर प्रभावित तटीय जिलों में – एक रणनीतिक कदम है। यह निम्नलिखित लाभ देता है:
- जनता को ताज़ा जानकारी मिलती रहती है, ताकि वे समय पर निर्णय ले सकें (जैसे — सुरक्षित स्थान पर चले जाना, नाव बंद करना, बिजली-पानी बंद करना)।
- प्रशासन-विभागों, स्थानीय-प्रशासन व राहत-टीमों के बीच समन्वय बेहतर होता है।
- अफवाहों व गलत सूचनाओं से बचाव में मदद मिलती है क्योंकि तथ्य-अधारित अपडेट दिए जाते हैं।
- जोखिम स्तर (जैसे तटाड़गत सायरस, सागर स्तर, तूफानी हवाएँ) लगातार जनता के सामने रहता है — इससे लोगों की तैयारी बेहतर होती है।
इसलिए, तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए बुलेटिन को नियमित रूप से फॉलो करना-बहुत आवश्यक हो जाता है।
5. आम नागरिकों के लिए तैयारी की चेक-लिस्ट
अगर आप आंध्र-प्रदेश के तटीय जिलों (जैसे कृष्णा, गुंटूर, बापटला, एनटीआर, वेस्ट गोडावरी) में रहते हैं, तो नीचे दी गई तैयारियों को ध्यान से अपनाएँ:
- राहत केंद्र का पता पहले से जान लें। महत्वपूर्ण दस्तावेज (पहचान-प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड, बैंक पासबुक), मोबाइल चार्जर, टॉर्च, रेडियो तैयार रखें।
- अपने और परिवार की सुरक्षा के लिए उपर के फ्लोर में सामान रखें, खाली करें दरवाजे-खिड़कियाँ सुरक्षित करें, नाव/वाहन बांध लें।
- समुद्र किनारे, तटबंधों, कम-उँचाई ज़मीनों से दूर रहें। शांति के क्षण में भी सावधानी आवश्यक है — “तूफान Montha आने वाला हो सकता है।
- डॉक्टरकी सलाह वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों वाले परिवारों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- बिजली-पानी सप्लाई बंद होने की संभावना को समझें — बैकअप चार्जर, पावर बैंक रखें।
- तूफान गुजरने के बाद भी खतरे खत्म नहीं होते — नीचे बिजली लाइनें टूट सकती हैं, पेड़ गिर सकते हैं, जल-भराव हो सकता है, सांप/चूहे आ सकते हैं। इसलिए राहत केंद्र या सुरक्षित स्थान पर वापसी के निर्देशों का इंतज़ार करें।
6. सीख-अनुभव: पिछले तूफानों से
आन्ध्र-प्रदेश पूर्व में कई बड़े तूफानों की मार झेल चुका है — जैसे Cyclone Hudhud (2014) जिसने भारी विनाश किया था। उस अनुभव से यह बातें सामने आई थीं: समय रहते चेतावनी, व्यापक लोकसंख्या को सुरक्षित स्थान पर ले जाना, बिजली-सड़क व संचार संरचनाओं को बचाना, स्वास्थ्य व सैनिटेशन की तैयारी। इस बार इन सब बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है।
7. चुनौतियाँ जो अभी बनी हुई हैं
हालाँकि बेहतर तैयारी हो रही है, पर कुछ चुनौतियाँ अभी बनी-बनी हैं:
- “तूफान Montha का ट्रैक या तीव्रता अचानक बदल सकती है — मॉडलों में त्रुटि संभव है।
- लोग समय पर नहीं निकल पा रहे होंगे, स्वयं-निर्धारित राहत-केंद्र नहीं पहुँचेंगे।
- दूरस्थ गावों में राहत पहुँचाना कठिन रहेगा, विशेषकर जब सड़कें बंद हों।
- नेटवर्क/संचार बाधा उत्पन्न हो सकती है — मोबाइल, इंटरनेट बंद हो सकते हैं।
- तूफान के बाद कई दिन बिजली-पानी बंद हो सकते हैं; स्वास्थ्य-रिश्तेदारों, वृद्धों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
- जानकारी-असमानता: सरकारी बुलेटिन नहीं पढ़ने या समझने वालों में संख्या होगी।
8. अगले 24-48 घंटे में क्या देखें
- मौसम विभाग की ताज़ा जानकारी — तूफान के विकास व दिशा-परिवर्तन।
- राज्य सरकार द्वारा जारी प्रत्येक घंटा बुलेटिन — देखें क्या जानकारी दी जा रही है, किस जिले/मंडल में कितना जोखिम है।
- अन्य राज्यों (तमिल नाडु, ओड़िशा) में भी चेतावनियाँ — क्योंकि असर सीमित नहीं रह सकता।
- राहत-बलों व केंद्रीय संसाधनों की तैनाती का स्तर।
- तूफान उतरने के बाद तुरंत राहत-कार्यों की गति — बिजली बहाली, सड़क खोलना, स्वास्थ्य चौकियाँ शुरू होना।
9. निष्कर्ष
तूफान मोंथा हमारे तटवर्ती इलाकों के लिए गंभीर चुनौती है। राज्य सरकार द्वारा प्रति घंटा बुलेटिन देने का निर्णय और केंद्र की सहयोग-प्रेरित भूमिका इस बात का संकेत है कि तैयारियाँ पूरी-तैयार हैं। लेकिन यह केवल तैयारियों की शुरुआत है — नागरिकों का सतर्क होना, निर्देशों का पालन करना, समय रहते निर्णय लेना उतना ही महत्वपूर्ण है।
तूफान आते समय “जान बचाना” सबसे महत्वपूर्ण है — इसलिए सूचना को नजरअंदाज़ न करें, अफवाहों से बचें, सरकारी बुलेटिन तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। अगले 48 घंटों में क्या होगा, इस पर हमारी आंखें टिकी हैं — आप भी तैयार रहें।
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