भारत की हवाई यात्रा का महासंकट: इंडिगो का ‘ऑपरेशनल मेलडाउन’ और पायलटों के आराम की कीमत – एक विस्तृत विश्लेषण

भारत, जिसकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है और जहाँ घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या हर साल नए रिकॉर्ड छूती है, के लिए दिसंबर 2025 का पहला सप्ताह एक काला अध्याय लेकर आया। देश की सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली एयरलाइन, इंडिगो (IndiGo), अभूतपूर्व ‘ऑपरेशनल मेलडाउन’ (परिचालन पतन) के भंवर में फंस गई। यह संकट इतना विशाल था कि देश के लगभग सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर अराजकता फैल गई, सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं और हज़ारों यात्री असहाय होकर फंसे रह गए। यह केवल उड़ानों के रद्द होने का मामला नहीं था; यह गलत प्रबंधन (Mismanagement), नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) में चूक और लाभ-उन्मुख रणनीति (Lean Manpower Strategy) के कारण पैदा हुए एक गहरे संकट का स्पष्ट प्रमाण था। इस आलेख में, हम इस महासंकट की तह तक जाएंगे। हम न केवल घटनाक्रम को समझेंगे, बल्कि सरकारी प्रतिक्रिया (DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय), इंडिगो के स्पष्टीकरण और सबसे महत्वपूर्ण, इस पूरे घटनाक्रम के मूल कारण—फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) नियमों को लागू करने में हुई भारी चूक—का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। I. संकट का केंद्र: जब उड़ानें बस रुक गईं A. अभूतपूर्व अराजकता का दृश्य (The Scene of Unprecedented Chaos) दिसंबर 2025 की शुरुआत में, विशेष रूप से 5 और 6 दिसंबर को, भारत की हवाई यात्रा प्रणाली लगभग ध्वस्त हो गई। देश के लगभग 60% घरेलू बाज़ार पर कब्ज़ा रखने वाली इंडिगो ने एक ही दिन में 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं। यह संकट दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में सबसे ज़्यादा गंभीर था। दिल्ली हवाई अड्डे से इंडिगो की सभी उड़ानें एक दिन के लिए पूरी तरह से निलंबित रहीं, क्योंकि एयरलाइन अपने क्रू को सही स्थानों पर तैनात करने और रोस्टर को पुनर्व्यवस्थित करने की “रिबूट” प्रक्रिया में लगी हुई थी। कल्पना कीजिए, देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर, त्योहारी और विवाह के सीज़न के चरम पर, अचानक एक प्रमुख एयरलाइन के सभी प्रस्थान रद्द हो जाते हैं। यात्री घंटों लाइन में खड़े रहे, उन्हें अपनी यात्रा की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा और अक्सर एयरलाइन कर्मचारियों से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। यात्रियों की दुर्दशा मार्मिक थी। सोशल मीडिया पर आक्रोश का माहौल था। लोग भोजन, पानी और आवास की कमी की शिकायत कर रहे थे। वृद्ध नागरिक (Senior Citizens), बीमार लोग (Patients) और छात्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए, जिनकी आवश्यक यात्रा योजनाएं एक झटके में तबाह हो गईं। यह संकट उस समय आया जब नागरिक उड्डयन उद्योग पहले से ही भारी यात्री यातायात और मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिसने इस समस्या को और विकराल बना दिया। B. यात्रियों का विरोध और एयरलाइन का डगमगाता प्रदर्शन कई हवाई अड्डों पर, जैसे कि श्रीनगर और जम्मू, फंसे हुए यात्रियों ने विरोध प्रदर्शन किया, क्योंकि उन्हें अंतिम समय में अपनी उड़ानें रद्द होने की सूचना मिली थी और एयरलाइन ने उनकी संकट कॉल का जवाब देने में कथित तौर पर विफल रही थी। संकट के चरम पर, इंडिगो का ऑन-टाइम प्रदर्शन (OTP) 8.5% तक गिर गया, जबकि यह आमतौर पर 80% से ऊपर रहता है। यह प्रदर्शन किसी भी एयरलाइन के लिए एक शर्मनाक पतन था, जिसने इंडिगो की 19 वर्षों से बनी विश्वसनीयता को गंभीर रूप से हिला दिया, जैसा कि CEO ने स्वयं स्वीकार किया। II. संकट का मूल कारण: FDTL नियमों की अनदेखी और प्रबंधन की चूक संकट के तुरंत बाद, इंडिगो ने शुरुआत में इसे “तकनीकी गड़बड़ियों, शीतकालीन शेड्यूल परिवर्तनों, खराब मौसम और हवाई क्षेत्र में बढ़ी हुई भीड़” सहित “अनेक अप्रत्याशित परिचालन चुनौतियों” का परिणाम बताया। हालांकि, सरकार और नियामक संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की गहन जांच के बाद असली कारण सामने आया: A. FDTL नियमों में बदलाव और क्रू की कमी संकट का मुख्य कारण पायलटों के लिए संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) नियमों को लागू करने में एयरलाइन की विफलता थी। FDTL नियम क्या हैं? DGCA ने पायलटों में थकान (Fatigue) को कम करने और उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2024 में FDTL नियमों में संशोधन किया था, जिसे कोर्ट के निर्देश के बाद दो चरणों में लागू किया गया था (पहला चरण जुलाई 2025 में और दूसरा चरण 1 नवंबर 2025 को)। इन नियमों के प्रमुख बदलावों में शामिल थे: ये नियम, जो पायलटों की सुरक्षा और आराम के लिए महत्वपूर्ण थे, का सीधा मतलब था कि एयरलाइन को अपने मौजूदा शेड्यूल को बनाए रखने के लिए अधिक पायलटों की आवश्यकता होगी। B. इंडिगो का कुप्रबंधन (Mismanagement) इंडिगो, जो अपने कम लागत वाले वाहक मॉडल के लिए…

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