आधुनिक विज्ञान का गूढ़ रहस्य और प्राचीन हिंदू दर्शन की ब्रह्मांडीय ध्वनि: डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और सनातन ज्ञान

परिचय: “कल्पना कीजिए… आप जिस ब्रह्मांड में रहते हैं, उसका 95% हिस्सा आपके लिए अदृश्य (Invisible) है! यह वह गूढ़ सत्य है जिसे आधुनिक विज्ञान आज स्वीकार कर रहा है। डार्क मैटर (Dark Matter) और डार्क एनर्जी (Dark Energy) – ये दो रहस्यमय शक्तियाँ हमारे कॉसमॉस की पूरी संरचना और विस्तार को नियंत्रित करती हैं, फिर भी हम इनके बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानते। वैज्ञानिकों के लिए ये ब्रह्मांड के सबसे बड़े अनसुलझे प्रश्न हैं, जो उन्हें हर रोज़ रात में सोने नहीं देते। लेकिन क्या यह रहस्य केवल आधुनिक खोजों का परिणाम है? क्या हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने, जिन्होंने गहन ध्यान और अंतर्दृष्टि के माध्यम से ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का प्रयास किया, इन अदृश्य शक्तियों के बारे में कुछ संकेत दिए थे? इस लेख में, हम डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की आधुनिक वैज्ञानिक समझ को हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर उपनिषदों, भागवत गीता और सांख्य दर्शन के गूढ़ दर्शन के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे। theswadeshscoop.com पर आपका स्वागत है, जहाँ हम ज्ञान के विभिन्न धाराओं को एक साथ लाते हैं।” डार्क मैटर और डार्क एनर्जी: आधुनिक विज्ञान का अनसुलझा कोड आइए सबसे पहले इन दोनों वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझते हैं। http://Vedic Cosmology on Dark Matter 1. डार्क मैटर (Dark Matter): अदृश्य गोंद हमारा ब्रह्मांड तारों, ग्रहों, आकाशगंगाओं और नीहारिकाओं (nebulae) जैसे दृश्यमान पदार्थ (Ordinary Matter) से बना है, जिसे हम अपनी आँखों से देख सकते हैं या उपकरणों से माप सकते हैं। लेकिन वैज्ञानिक गणनाएँ बताती हैं कि यह दृश्यमान पदार्थ ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान (Total Mass) का केवल 5% ही है। बाकी लगभग 27% हिस्सा ‘डार्क मैटर’ से बना है। 2. डार्क एनर्जी (Dark Energy): ब्रह्मांड का विस्तारक बल ब्रह्मांड के कुल पदार्थ-ऊर्जा (Mass-Energy) का लगभग 68% हिस्सा ‘डार्क एनर्जी’ है। यह डार्क मैटर से भी अधिक रहस्यमय है। ये दोनों अवधारणाएँ मिलकर ब्रह्मांड के 95% हिस्से का निर्माण करती हैं, जिसके बारे में हमारी वर्तमान वैज्ञानिक समझ बहुत सीमित है। यह हमारे अस्तित्व की सबसे मौलिक पहेली है। हिंदू दर्शन की ब्रह्मांडीय अंतर्दृष्टि: अनदेखी शक्तियों का ज्ञान अब हम हिंदू धर्मग्रंथों की ओर मुड़ते हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्राचीन ऋषि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं या दूरबीनों का उपयोग नहीं करते थे। उन्होंने गहन आत्मनिरीक्षण (Introspection), ध्यान (Meditation) और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि (Spiritual Insight) के माध्यम से ब्रह्मांड के गूढ़ सत्यों को समझने का प्रयास किया। उनके दर्शन में कुछ ऐसे सिद्धांत मिलते हैं जो डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की अवधारणाओं के साथ अद्भुत वैचारिक समानताएं रखते हैं। 1. अव्यक्त प्रकृति और पुरुष: डार्क मैटर की प्राचीन ध्वनि सांख्य दर्शन, जो हिंदू दर्शन के छह मुख्य स्कूलों में से एक है, ब्रह्मांड को पुरुष (Consciousness) और प्रकृति (Matter/Energy) के दो शाश्वत सिद्धांतों से समझाता है। यहां, डार्क मैटर की अवधारणा को अव्यक्त प्रकृति या पुरुष के साथ जोड़ा जा सकता है: 2. शक्ति और माया: डार्क एनर्जी का गतिशील स्वरूप हिंदू दर्शन में शक्ति ब्रह्मांड की दिव्य स्त्री ऊर्जा है, जो सृजन, गति, संरक्षण और विनाश की मूल शक्ति है। माया वह ब्रह्मांडीय शक्ति है जो भ्रम (Illusion) पैदा करती है और इस भौतिक दुनिया को प्रकट करती है। http://Lord Shiva and Dark Energy 3. उपनिषद और वेदों में अप्रकट की खोज उपनिषदों और वेदों में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसकी अंतर्निहित (inherent) प्रकृति पर गहरा चिंतन मिलता है। 4. अष्टधा प्रकृति (भागवत गीता): सूक्ष्म तत्व भागवत गीता में भगवान कृष्ण अपनी अष्टधा प्रकृति का वर्णन करते हैं, जिसमें आठ तत्व शामिल हैं: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश (स्थूल या प्रकट तत्व), मन, बुद्धि और अहंकार (सूक्ष्म या अप्रकट तत्व)। Ref: http://Dark Matter and Dark Energy in Hindu Scriptures निष्कर्ष: विज्ञान और अध्यात्म का संगम आधुनिक विज्ञान ने हमें ब्रह्मांड के भौतिक रहस्यों के बारे में अभूतपूर्व जानकारी दी है, लेकिन डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसी अवधारणाएँ हमें यह भी बताती हैं कि हम अभी भी ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से से अनभिज्ञ (ignorant) हैं। वहीं, हिंदू धर्मग्रंथ और दर्शन, हजारों साल पहले ही, ब्रह्मांड के एक ऐसे दृष्टिकोण को प्रस्तुत कर चुके हैं जहाँ अदृश्य, अप्रकट और गतिशील शक्तियाँ सृष्टि के मूल में हैं। वेदों का ‘अव्यक्त’, सांख्य की ‘प्रकृति’ और ‘पुरुष’, और शक्ति की गतिशील ऊर्जा, ये सभी आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान के उन 95% अनदेखे हिस्सों के साथ एक गहरा वैचारिक संवाद स्थापित करते हैं। यह संयोग नहीं हो सकता। यह शायद हमें बताता है कि विज्ञान और अध्यात्म, भले ही अलग-अलग रास्ते हों, अंततः एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं—एक ऐसा सत्य जहाँ अस्तित्व का अधिकांश भाग हमारी सीमित धारणाओं…

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