स्पेसएक्स (SpaceX) तेजी से अपने स्टारशिप (Starship) वाहन को विकसित कर रहा है। यह पूरी तरह से पुन: प्रयोज्य (fully reusable) सुपर हैवी-लिफ्ट लॉन्च सिस्टम (super heavy-lift launch system) है जो चंद्रमा पर इंसानों को वापस भेजने की नासा (NASA) की योजनाओं का केंद्र बिंदु है। स्टारशिप, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर (Super Heavy booster) और स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (Starship spacecraft) (दूसरा चरण) शामिल हैं, सिर्फ एक और रॉकेट नहीं है—इसे चंद्रमा पर और अंततः मंगल ग्रह पर एक स्थायी मानव उपस्थिति (sustainable human presence) स्थापित करने के लिए आधारस्तंभ (backbone) के रूप में डिज़ाइन किया गया है।https://www.spacex.com/vehicles/starship/
चंद्र मिशन: आर्टेमिस III और उससे आगे (Lunar Mission: Artemis III and Beyond)
https://www.nasa.gov/mission/artemis-iii/ चंद्रमा के लिए स्टारशिप की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका नासा के आर्टेमिस III मिशन (NASA’s Artemis III mission) के लिए मानव लैंडिंग सिस्टम (Human Landing System – HLS) के रूप में है। यह मिशन, जिसका लक्ष्य वर्तमान में 2027 के मध्य (no earlier than mid-2027) से पहले नहीं रखा गया है, 50 से अधिक वर्षों में पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य रखता है।
- लैंडर (The Lander): स्टारशिप एचएलएस मुख्य स्टारशिप वाहन का एक प्रकार है, जिसे विशेष रूप से चंद्र सतह पर उतरने और वहां से उड़ान भरने के लिए अनुकूलित (optimized) किया गया है। यह अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को चंद्र कक्षा (lunar orbit) से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के पास के क्षेत्र तक पहुंचाएगा।
- अद्वितीय क्षमता (Unmatched Capability): स्टारशिप का विशाल आकार इसे एक बड़ा लाभ देता है; यह चंद्र सतह पर 100 मीट्रिक टन तक कार्गो (up to 100 metric tons of cargo) वितरित करने में सक्षम है। यह ऐतिहासिक अपोलो लूनर मॉड्यूल (Apollo Lunar Module) की क्षमता को बौना कर देता है और यह एक दीर्घकालिक चंद्र बेस (long-term lunar base) बनाने के लिए आवश्यक आपूर्ति, रोवर और आवास लाने के लिए अनिवार्य है।
कक्षा में ईंधन भरने की चुनौती (The Challenge of In-Orbit Refueling)

चंद्रमा तक की यात्रा करने के लिए, स्टारशिप को एक महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास (critical maneuver) करना होगा जिसे अभी तक पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं किया गया है: कक्षा में ईंधन भरना (in-orbit refueling)।
- ईंधन की आवश्यकता (The Need for Fuel): स्टारशिप इतनी बड़ी और शक्तिशाली है कि यह एक ही लॉन्च में चंद्रमा तक पहुंचने के लिए पर्याप्त प्रोपेलेंट (तरल मीथेन और ऑक्सीजन) नहीं ले जा सकती।
- योजना (The Plan): मानवरहित स्टारशिप “टैंकर” (Starship “tanker”) वेरिएंट के कई लॉन्च पृथ्वी की कक्षा में स्थापित एक स्टारशिप प्रोपेलेंट डिपो (Starship propellant depot) तक ईंधन पहुंचाएंगे। फिर क्रू वाला स्टारशिप एचएलएस (crewed Starship HLS) चंद्रमा की ओर बढ़ने से पहले अपने टैंकों को भरने के लिए डिपो के साथ मिलन (rendezvous) और डॉकिंग करेगा। स्पेसएक्स ने 2026 तक प्रोपेलेंट ट्रांसफर के प्रदर्शन का लक्ष्य रखा है।
स्टारशिप की मुख्य विशेषताएं (Key Features of Starship)
स्टारशिप की डिजाइन फिलॉसफी पूर्ण और तीव्र पुन: प्रयोज्यता (full and rapid reusability) पर केंद्रित है, एक ऐसी अवधारणा जो अंतरिक्ष उड़ान की लागत को भारी रूप से कम (drastically lower the cost) करने के लिए तैयार है।

- पूरी तरह से पुन: प्रयोज्य: सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट दोनों को लॉन्च साइट पर वापस लौटने और ऊर्ध्वाधर रूप से उतरने (land vertically) के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो अपनी अगली उड़ान के लिए जल्दी से नवीनीकृत (refurbished) होने के लिए तैयार हैं। बूस्टर को लॉन्च टॉवर पर यांत्रिक भुजाओं (mechanical arms) द्वारा ‘पकड़े’ जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- शक्तिशाली इंजन (Powerful Engines): यह प्रणाली अत्यधिक उन्नत रैप्टर इंजन (Raptor engines) द्वारा संचालित है, जो तरल मीथेन (liquid methane) और तरल ऑक्सीजन (liquid oxygen) जलाते हैं। पूर्ण उड़ान में अकेले सुपर हैवी बूस्टर में 33 रैप्टर इंजन होने की उम्मीद है।
- आकार (Size): स्टैक किए जाने पर लगभग 120 मीटर (लगभग 400 फीट) ऊंचा खड़ा, स्टारशिप अब तक विकसित किया गया सबसे शक्तिशाली लॉन्च वाहन (most powerful launch vehicle ever developed) है, जो नासा के अपने स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) और अपोलो को चंद्रमा पर ले जाने वाले सैटर्न V रॉकेट को पार करता है।
जबकि स्टारशिप का विकास और उड़ान परीक्षण (flight testing) चल रहा है, यह विशाल वाहन अंतरिक्ष अन्वेषण (space exploration) में एक गहरा बदलाव दर्शाता है, जो मानवता को अंतरग्रहीय प्रजाति (interplanetary species) बनाने के लक्ष्य की ओर एकल मिशनों से आगे बढ़ रहा है।
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