कर्म और भाग्य का रहस्य (Karma vs Fate)

“कर्म और भाग्य का दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व”

परिचय

कर्म और भाग्य—ये दो शब्द न केवल भारतीय दर्शन के गहरे रहस्यों को दर्शाते हैं बल्कि हमारे जीवन के अनुभवों और निर्णयों पर भी इनमें गहरा प्रभाव होता है। जहाँ karma (कर्म) हमारे कर्मों और उनके परिणामों की प्रक्रिया को सूचित करता है, वहीं fate (भाग्य) को जीवन में पूर्वनियोजित घटनाओं और नियति के रूप में समझा जाता है। यह विषय केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि आज के युग में हमारी मानसिकता, प्रयासों, और जीवन के उतार-चढ़ाव के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है। भारत के प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक भारतीय ज्योतिषशास्त्र तक, कर्म और भाग्य के विषय में ज्ञान विस्तृत है। इस लेख में हम कर्म और भाग्य की परिभाषा, उनके बीच के संबंध, और आधुनिक जीवन में उनके अनुप्रयोग को गहराई से समझेंगे। साथ ही विज्ञान और सांस्कृतिक संदर्भ में भी इनकी प्रासंगिकता पर चर्चा करेंगे।

विस्तार (Explanation)

कर्म (Karma) क्या है?

संस्कृत शब्द “कर्म” का अर्थ है “कार्य”, इसका दायरा हमारे द्वारा किया गया हर शारीरिक, मौखिक या मानसिक कार्य है। लेकिन कर्म केवल क्रिया नहीं, बल्कि उनके परिणामों का चक्र भी है। कर्म सिद्धांत के अनुसार, हमारे कर्मों का फल अवश्यम्भावी होता है और वह न केवल वर्तमान जन्म में, बल्कि पुनर्जन्मों के चक्र में भी लागू होता है। सरल शब्दों में, हम जो करते हैं, उसका प्रभाव अनिवार्य रूप से हमें मिलता है।

भाग्य (Fate) क्या है?

भाग्य को नियति, प्राकृत भविष्य या पूर्वनिर्धारित जीवन पथ के रूप में समझा जा सकता है। भारतीय दर्शन में यह माना गया है कि कुछ घटनाएं और परिस्थितियां हमारी चेतना से परे एक उच्च शक्ति या ब्रह्मांडीय नियम के अधीन होती हैं, जिन्हें हम भाग्य के नाम से जानते हैं। भाग्य जीवन की उन परिस्थितियों का सूचक है, जिन्हें हम बदल नहीं सकते, लेकिन उन्हें स्वीकार करके आगे बढ़ सकते हैं।

ग्रंथों और अनुभवों का संदर्भ

भगवद गीता में कर्म ज्ञान का विस्तृत उल्लेख है। गीता के अनुसार कर्म तीन प्रकार के होते हैं:

  • सकर्म (Sakarma): जो कर्म धर्म और नियम के अनुसार सामंजस्यपूर्ण होता है और जिसके परिणाम शुभ होते हैं।
  • अकर्म (Akarma): जो कर्म निष्क्रिय या ऐसा होता है जिससे कर्मफल प्राप्त नहीं होता।
  • विकार्म (Vikarma): जो अधार्मिक या अनैतिक कर्म होता है, जिससे दुष्परिणाम होते हैं।

भगवान कृष्ण कहते हैं,
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” (गीता 2.47),
जिसका अर्थ है कि कर्म करने में हमारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में नहीं। यह दृष्टिकोण कर्म के प्रति हमारी जिम्मेदारी और फल की अनिश्चितता को दर्शाता है।

भारतीय ज्योतिषशास्त्र में भी कर्म और भाग्य का अद्भुत समावेश है। जन्मकुंडली के विभिन्न भाव और ग्रह जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कर्म और भाग्य की भूमिका बताते हैं।

  • लग्न भाव और ग्रह हमारी कर्मभूमि और स्वभाव को दर्शाते हैं।
  • दशा और अंतरदशा तंत्र जीवन के विभिन्न चरणों में भाग्य के प्रभाव को स्पष्ट करते हैं।

कर्म और भाग्य का आधुनिक जीवन में अनुप्रयोग

वर्तमान विज्ञान और तकनीकी उन्नति के युग में भी कर्म और भाग्य की अवधारणा समान रूप से प्रासंगिक है। भाग्य जीवन में अवसर, प्रतिभा और कुछ सुरुआती परिस्थिति देता है, पर कर्म वह निरंतर प्रयास है जो सफलता, संतुष्टि और स्थायित्व सुनिश्चित करता है।

धार्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर हमें यह समझना आवश्यक है कि भाग्य हमें एक दिशा देता है, लेकिन कर्म हमारे जीवन को आकार देता है।

मुख्य बिंदु (Key Points)

  • हिंदू धर्मग्रंथों का दृष्टिकोण:
    गीता एवं उपनिषदों में कर्म के वर्गीकरण (सकर्म, अकर्म, विकार्म) का विस्तृत उल्लेख मिलता है। गीता में कर्मयोग को जीवन का आधार माना गया है।
  • भारतीय ज्योतिष में कर्म और भाग्य:
    जन्मकुंडली के भाव ग्रहों द्वारा कर्म और भाग्य के विभिन्न पहलू स्पष्ट होते हैं। ग्रह दशाओं के माध्यम से जीवन के विभिन्न चरणों में भाग्य के उतार-चढ़ाव को समझा जाता है।
  • क्या अनुसरण करें और क्यों:
    • कर्म पर ध्यान देना आवश्यक, क्योंकि यह चार पुरुषार्थों — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — की आधारशिला है।
    • भाग्य को आत्मसंतुष्टि और वर्तमान परिस्थितियों को स्वीकार करने के रूप में देखें, न कि मात्र सक्रिय नियंत्रण के रूप में।
    • गीता के श्लोक “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूमा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥“” के अनुसार कर्म मूल है और फलों की चिंता नहीं करनी चाहिए।
  • वर्तमान 21वीं सदी का संदर्भ:
    • भाग्य त्वरित सफलता या लोकप्रियता दिला सकता है, उदाहरण के लिए सोशल मीडिया पर वायरल होना या अचानक आर्थिक लाभ।
    • लेकिन कर्म ही उस सफलता की स्थिरता और दीर्घायु तय करता है।
    • व्यावहारिक अनुभव से यह सिद्ध होता है कि केवल कर्म और समर्पण पर विश्वास सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है।
    • कर्म को भगवान कृष्ण को समर्पित कर देना और परिणामों को उनकी इच्छा मानना मानसिक शांति और दृढ़ता प्रदान करता है।

Read this : https://www.gitasupersite.iitk.ac.in/srimad?htrskd=1&httyn=1&htshg=1&scsh=1&choos=&&language=dv&field_chapter_value=2&field_nsutra_value=47

विज्ञान और संस्कृति के संदर्भ में कर्म और भाग्य

विज्ञान की दृष्टि से

न्यूटन के गति नियमों के अनुसार हर क्रिया की प्रतिक क्रिया होती है, जो कर्म के सिद्धांत से सुसंगत है। न्यूरोसाइंस बताती है कि हमारे मानसिक और शारीरिक कर्म हमारे मस्तिष्क और व्यवहार में बदलाव लाते हैं। इस प्रकार, कर्म एक जीवंत, कालानुकूल सिद्धांत है।

भाग्य को आधुनिक विज्ञान में पूर्ण नियति के बजाय संभावनाओं और आकस्मिकताओं से जोड़कर देखा जाता है। भौतिकी के क्वांटम सिद्धांत में अनिश्चितता के सिद्धांत के कारण भविष्य के कुछ तत्व निश्चित नहीं होते, जो भाग्य की अपर्याप्तता को दर्शाता है।

आधुनिक संस्कृति में प्रभाव

आज की युवा पीढ़ी में भाग्य को लेकर आकांक्षाएँ और भ्रम दोनों हैं। जबकि कई युवा सफलता के लिए भाग्य को जिम्मेदार ठहराते हैं, कर्म पर आधारित जीवन दृष्टिकोण उन्हें सशक्त बनाता है। समाज में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चार पुरुषार्थों के संगम पर कर्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सारांश (Summary)

इस लेख में हमने कर्म और भाग्य के रहस्य को प्रभूत गहनता से समझा। कर्म वे कार्य और प्रयास हैं जिन्हें हम स्वयं नियंत्रित कर सकते हैं और ये हमारे पुनर्जन्मों के चक्र तक के लिए फलदायी होते हैं। भाग्य उन परिस्थितियों का समूह है जो एक उच्च शक्ति या नियति द्वारा निर्धारित होता है।

भारतीय धार्मिक ग्रंथों जैसे Bhagavad Gita और उपनिषदों में कर्म की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है, और भारतीय ज्योतिषशास्त्र भी कर्म और भाग्य को ग्रहों और भावों के माध्यम से समझाता है। आधुनिक विज्ञान भी कर्म के सिद्धांत का समर्थन करता है जबकि भाग्य को संभावनाओं के संदर्भ में देखता है।

आज के युग में जहां भाग्य जल्दी सफलता दे सकता है, वहीं कर्म ही सफलता की स्थिरता और दीर्घायु तय करता है। इसलिए, हमें अपने कर्मो के प्रति समर्पित रहना चाहिए और फल की चिंता किए बिना निष्ठा से कार्य करना चाहिए — इस प्रकार ही हम जीवन में सही दिशा, मानसिक शांति और पूर्णता पा सकते हैं।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव भी यही कहता है कि कर्म को भगवान कृष्ण को समर्पित करना, परिणाम की चिंता बिना, ही आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों रूपों में जीवन को सफल बनाता है। यही संदेश युवाओं तक पहुंचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि वे अपने जीवन को सशक्त और सकारात्मक दिशा दें।

Read this too :

https://theswadeshscoop.com/tambe-ke-paatr-se-dudh-kyun-nahi-chadhana/: कर्म और भाग्य का रहस्य (Karma vs Fate)

Aryan Invasion Theory – AIT

Deepak Kumar Mishra

लेखक परिचय: दीपक कुमार मिश्रा दीपक कुमार मिश्रा एक ऐसे लेखक और विचारशील व्यक्तित्व हैं, जो विज्ञान और प्रबंधन की शिक्षा से लेकर आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक चेतना तक का संतुलन अपने लेखों में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा मानव व्यवहार, नेतृत्व विकास और धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को समझने और उन्हें समाज में प्रसारित करने में समर्पित किया है। दीपक जी एक अनुभवी लाइफ कोच, बिज़नेस कंसल्टेंट, और प्रेरणादायक वक्ता भी हैं, जो युवाओं, उद्यमियों और जीवन के रास्ते से भटके हुए लोगों को सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। वे मानते हैं कि भारत की हज़ारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा न केवल आध्यात्मिक समाधान देती है, बल्कि आज की जीवनशैली में मानसिक शांति, कार्यक्षमता और संतुलन का भी मूलमंत्र है। उनका लेखन केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पाठकों को सोचने, समझने और जागरूक होने के लिए प्रेरित करता है। वे विषयवस्तु को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि पाठक केवल पढ़ता नहीं, बल्कि उसमें डूब जाता है — चाहे वह विषय आध्यात्मिकता, बिज़नेस स्ट्रैटेजी, करियर मार्गदर्शन, या फिर भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ी गहराइयाँ ही क्यों न हो। उनका मानना है कि भारत को जानने और समझने के लिए केवल इतिहास नहीं, बल्कि धर्म, दर्शन और अनुभव की आंखों से देखना ज़रूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने The Swadesh Scoop की स्थापना की — एक ऐसा मंच जो ज्ञान, जागरूकता और भारत की वैदिक चेतना को आधुनिक युग से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। 🌿 "धर्म, विज्ञान और चेतना के संगम से ही सच्ची प्रगति का मार्ग निकलता है" — यही उनका जीवन दर्शन है। Linkedin profile : https://www.linkedin.com/in/deepak-kumar-misra/?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app Author Bio: Deepak Kumar Mishra Deepak Kumar Mishra is a profound writer and a thoughtful personality who skillfully balances his academic background in science and management with a deep-rooted connection to spirituality and cultural consciousness. He has devoted a significant part of his life to understanding the nuances of human behavior, leadership development, and the spiritual principles of Dharma, and to sharing this wisdom with society. Deepak is an experienced life coach, business consultant, and motivational speaker who works passionately to guide young individuals, entrepreneurs, and those who feel lost in life. He firmly believes that India’s thousands of years old Sanatan tradition not only offers spiritual guidance but also provides essential tools for mental peace, efficiency, and balanced living in today’s fast-paced world. His writing goes beyond mere information; it inspires readers to think, reflect, and awaken to deeper truths. He presents content in a way that the reader doesn’t just read it but immerses themselves in it — whether the subject is spirituality, business strategy, career coaching, or the profound depths of Indian cultural roots. He believes that to truly understand India, one must see it not only through the lens of history but also through the eyes of Dharma, philosophy, and experience. With this vision, he founded The Swadesh Scoop — a platform committed to connecting ancient Indian wisdom with modern perspectives through knowledge and awareness. 🌿 “True progress lies at the intersection of Dharma, science, and consciousness” — this is the guiding philosophy of his life.

Related Posts

काल भैरव जयंती: भय से मुक्ति और न्याय का पर्व

हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के रौद्र और तेजस्वी स्वरूप काल भैरव का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे काल भैरव जयंती या कालाष्टमी के नाम से जाना जाता है। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जो उन्हें भय, नकारात्मकता और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करता है। कब है काल भैरव जयंती 2025? वैदिक पंचांग के अनुसार: संक्षिप्त कथा: क्यों लिया शिव ने काल भैरव का रूप? पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव—इन त्रिदेवों में कौन श्रेष्ठ है, इस बात पर विवाद छिड़ गया। बहस के दौरान, ब्रह्मा जी ने अहंकारवश भगवान शिव का अपमान किया।https://www.jagran.com/spiritual/religion-kaal-bhairav-jayanti-2025-upay-in-hindi-remedies-significance-40031638.html भगवान शिव ने काल भैरव को इस पाप से मुक्ति पाने के लिए विभिन्न तीर्थों की यात्रा करने का आदेश दिया। अंत में, काशी (वाराणसी) में पहुँचते ही उनके हाथ से ब्रह्मा जी का कटा हुआ सिर (कपाल) गिर गया। तभी से उस स्थान को कपाल मोचन तीर्थ कहा जाता है, और भगवान शिव ने काल भैरव को काशी का ‘कोतवाल’ (नगर रक्षक) नियुक्त किया। आज भी यह मान्यता है कि काशी में किसी भी व्यक्ति को भैरव जी की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं मिलता। क्यों मनाते हैं काल भैरव जयंती और इसका महत्व? काल भैरव जयंती मुख्य रूप से अधर्म पर धर्म की विजय और अहंकार के नाश का प्रतीक है। कैसे मनाएं और सामान्य पूजा विधि काल भैरव जयंती पर रात्रि-जागरण और पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान भैरव की पूजा निशा काल (रात) में अधिक प्रभावी होती है: जप विधि और लाभ काल भैरव जयंती पर मंत्र जप का विशेष महत्व है। मंत्र (Jap Vidhi) लाभ (Benefits) सामान्य मंत्र: ॐ कालभैरवाय नमः भय, रोग और कष्टों से मुक्ति मिलती है। तामसिक बाधा निवारण: ॐ हं हं कालभैरवाय नमः नकारात्मक शक्तियों और तंत्र-मंत्र के प्रभाव को नष्ट करता है। बटुक भैरव मंत्र (सौम्य रूप): ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ सभी प्रकार की आपदाओं और संकटों से बचाता है। जप विधि: Note : Kindly consult your purohit for the japa and anushthan, आज के जीवन और संस्कृति में प्रासंगिकता काल भैरव जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह आज के जीवन में भी गहरी प्रासंगिकता रखती है: वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू आध्यात्मिक/दार्शनिक पक्ष वैज्ञानिक/मनोवैज्ञानिक पक्ष काल भैरव जयंती का पर्व हमें अपने भीतर के अहंकार और भय को दूर करने का एक सुनहरा अवसर देता है। Read this: https://theswadeshscoop.com/dark-matter-dark-energy-hindu-philosophy/

Read more

Continue reading
आधुनिक विज्ञान का गूढ़ रहस्य और प्राचीन हिंदू दर्शन की ब्रह्मांडीय ध्वनि: डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और सनातन ज्ञान

परिचय: “कल्पना कीजिए… आप जिस ब्रह्मांड में रहते हैं, उसका 95% हिस्सा आपके लिए अदृश्य (Invisible) है! यह वह गूढ़ सत्य है जिसे आधुनिक विज्ञान आज स्वीकार कर रहा है। डार्क मैटर (Dark Matter) और डार्क एनर्जी (Dark Energy) – ये दो रहस्यमय शक्तियाँ हमारे कॉसमॉस की पूरी संरचना और विस्तार को नियंत्रित करती हैं, फिर भी हम इनके बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानते। वैज्ञानिकों के लिए ये ब्रह्मांड के सबसे बड़े अनसुलझे प्रश्न हैं, जो उन्हें हर रोज़ रात में सोने नहीं देते। लेकिन क्या यह रहस्य केवल आधुनिक खोजों का परिणाम है? क्या हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने, जिन्होंने गहन ध्यान और अंतर्दृष्टि के माध्यम से ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का प्रयास किया, इन अदृश्य शक्तियों के बारे में कुछ संकेत दिए थे? इस लेख में, हम डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की आधुनिक वैज्ञानिक समझ को हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर उपनिषदों, भागवत गीता और सांख्य दर्शन के गूढ़ दर्शन के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे। theswadeshscoop.com पर आपका स्वागत है, जहाँ हम ज्ञान के विभिन्न धाराओं को एक साथ लाते हैं।” डार्क मैटर और डार्क एनर्जी: आधुनिक विज्ञान का अनसुलझा कोड आइए सबसे पहले इन दोनों वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझते हैं। http://Vedic Cosmology on Dark Matter 1. डार्क मैटर (Dark Matter): अदृश्य गोंद हमारा ब्रह्मांड तारों, ग्रहों, आकाशगंगाओं और नीहारिकाओं (nebulae) जैसे दृश्यमान पदार्थ (Ordinary Matter) से बना है, जिसे हम अपनी आँखों से देख सकते हैं या उपकरणों से माप सकते हैं। लेकिन वैज्ञानिक गणनाएँ बताती हैं कि यह दृश्यमान पदार्थ ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान (Total Mass) का केवल 5% ही है। बाकी लगभग 27% हिस्सा ‘डार्क मैटर’ से बना है। 2. डार्क एनर्जी (Dark Energy): ब्रह्मांड का विस्तारक बल ब्रह्मांड के कुल पदार्थ-ऊर्जा (Mass-Energy) का लगभग 68% हिस्सा ‘डार्क एनर्जी’ है। यह डार्क मैटर से भी अधिक रहस्यमय है। ये दोनों अवधारणाएँ मिलकर ब्रह्मांड के 95% हिस्से का निर्माण करती हैं, जिसके बारे में हमारी वर्तमान वैज्ञानिक समझ बहुत सीमित है। यह हमारे अस्तित्व की सबसे मौलिक पहेली है। हिंदू दर्शन की ब्रह्मांडीय अंतर्दृष्टि: अनदेखी शक्तियों का ज्ञान अब हम हिंदू धर्मग्रंथों की ओर मुड़ते हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्राचीन ऋषि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं या दूरबीनों का उपयोग नहीं करते थे। उन्होंने गहन आत्मनिरीक्षण (Introspection), ध्यान (Meditation) और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि (Spiritual Insight) के माध्यम से ब्रह्मांड के गूढ़ सत्यों को समझने का प्रयास किया। उनके दर्शन में कुछ ऐसे सिद्धांत मिलते हैं जो डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की अवधारणाओं के साथ अद्भुत वैचारिक समानताएं रखते हैं। 1. अव्यक्त प्रकृति और पुरुष: डार्क मैटर की प्राचीन ध्वनि सांख्य दर्शन, जो हिंदू दर्शन के छह मुख्य स्कूलों में से एक है, ब्रह्मांड को पुरुष (Consciousness) और प्रकृति (Matter/Energy) के दो शाश्वत सिद्धांतों से समझाता है। यहां, डार्क मैटर की अवधारणा को अव्यक्त प्रकृति या पुरुष के साथ जोड़ा जा सकता है: 2. शक्ति और माया: डार्क एनर्जी का गतिशील स्वरूप हिंदू दर्शन में शक्ति ब्रह्मांड की दिव्य स्त्री ऊर्जा है, जो सृजन, गति, संरक्षण और विनाश की मूल शक्ति है। माया वह ब्रह्मांडीय शक्ति है जो भ्रम (Illusion) पैदा करती है और इस भौतिक दुनिया को प्रकट करती है। http://Lord Shiva and Dark Energy 3. उपनिषद और वेदों में अप्रकट की खोज उपनिषदों और वेदों में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसकी अंतर्निहित (inherent) प्रकृति पर गहरा चिंतन मिलता है। 4. अष्टधा प्रकृति (भागवत गीता): सूक्ष्म तत्व भागवत गीता में भगवान कृष्ण अपनी अष्टधा प्रकृति का वर्णन करते हैं, जिसमें आठ तत्व शामिल हैं: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश (स्थूल या प्रकट तत्व), मन, बुद्धि और अहंकार (सूक्ष्म या अप्रकट तत्व)। Ref: http://Dark Matter and Dark Energy in Hindu Scriptures निष्कर्ष: विज्ञान और अध्यात्म का संगम आधुनिक विज्ञान ने हमें ब्रह्मांड के भौतिक रहस्यों के बारे में अभूतपूर्व जानकारी दी है, लेकिन डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसी अवधारणाएँ हमें यह भी बताती हैं कि हम अभी भी ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से से अनभिज्ञ (ignorant) हैं। वहीं, हिंदू धर्मग्रंथ और दर्शन, हजारों साल पहले ही, ब्रह्मांड के एक ऐसे दृष्टिकोण को प्रस्तुत कर चुके हैं जहाँ अदृश्य, अप्रकट और गतिशील शक्तियाँ सृष्टि के मूल में हैं। वेदों का ‘अव्यक्त’, सांख्य की ‘प्रकृति’ और ‘पुरुष’, और शक्ति की गतिशील ऊर्जा, ये सभी आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान के उन 95% अनदेखे हिस्सों के साथ एक गहरा वैचारिक संवाद स्थापित करते हैं। यह संयोग नहीं हो सकता। यह शायद हमें बताता है कि विज्ञान और अध्यात्म, भले ही अलग-अलग रास्ते हों, अंततः एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं—एक ऐसा सत्य जहाँ अस्तित्व का अधिकांश भाग हमारी सीमित धारणाओं…

Read more

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

इंडिया बनाम साउथ अफ्रीका 2nd टेस्ट: भारत को 408 रन से करारी हार, सीरीज 2-0 से SA के नाम

प्राचीन सभ्यताओं का खोया हुआ ज्ञान: क्या हम उसे वापस पा सकते हैं?

क्या एलियन सच में हमारे बीच हैं? Top 5 Alien Conspiracy Theories जो आज भी Unsolved हैं

क्या एलियन सच में हमारे बीच हैं? Top 5 Alien Conspiracy Theories जो आज भी Unsolved हैं

स्पेसएक्स का स्टारशिप: वह चंद्र रॉकेट जो अंतरिक्ष यात्रा को नया आकार देगा (SpaceX Starship: The Moon Rocket That Will Reshape Space Travel)

स्पेसएक्स का स्टारशिप: वह चंद्र रॉकेट जो अंतरिक्ष यात्रा को नया आकार देगा (SpaceX Starship: The Moon Rocket That Will Reshape Space Travel)

बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स पर सियासी घमासान: जानिए किस पोल ने किसे दी कितनी सीटें

बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स पर सियासी घमासान: जानिए किस पोल ने किसे दी कितनी सीटें

काल भैरव जयंती: भय से मुक्ति और न्याय का पर्व

काल भैरव जयंती: भय से मुक्ति और न्याय का पर्व