दिसंबर 2025 की सर्द सुबह अमेरिकी राजनीति और न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ी तपिश लेकर आई है। 19 दिसंबर 2025 वह ऐतिहासिक तारीख है, जब अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice – DOJ) को एक सख्त कानून के तहत जेफरी एपस्टीन से जुड़े उन सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करना है, जो दशकों से धूल फांक रहे थे या जानबूझकर छिपाए गए थे।
इस कानून, जिसे ‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’ (Epstein Files Transparency Act) कहा जाता है, ने दुनिया भर में कौतूहल पैदा कर दिया है। क्या वाकई कोई ‘क्लाइंट लिस्ट’ मौजूद है? क्या दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग जेल की सलाखों के पीछे होंगे? या फिर ‘नेशनल सिक्योरिटी’ के नाम पर एक बार फिर सच्चाई पर पर्दा डाल दिया जाएगा? https://www.theguardian.com/us-news/2025/dec/19/epstein-files-release-doj-december-deadline
1. कानूनी पृष्ठभूमि: एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट क्या है?
इस पूरे मामले की जड़ में वह कानून है जिसे नवंबर 2025 में पारित किया गया था। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) ने लगभग सर्वसम्मति से इस बिल को मंजूरी दी।
- हस्ताक्षर: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 नवंबर 2025 को इस पर हस्ताक्षर किए।
- डेडलाइन: कानून के प्रावधानों के अनुसार, न्याय विभाग के पास दस्तावेजों के वर्गीकरण (Declassification) और उन्हें सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करने के लिए केवल 30 दिनों का समय था। वह समय आज समाप्त हो रहा है।
- उद्देश्य: इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य उन पीड़ितों को न्याय दिलाना है, जिनका शोषण एपस्टीन के द्वीपों और हवेलियों में हुआ, और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अपराधी अपनी सत्ता या प्रभाव के पीछे न छिप सके।
2. फाइल्स का अंबार: आखिर क्या सार्वजनिक होने वाला है?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह डेटा रिलीज कई टेराबाइट्स (Terabytes) का हो सकता है। इसमें केवल कागजात ही नहीं, बल्कि डिजिटल साक्ष्य भी शामिल हैं।
A. फ्लाइट लॉग्स (Flight Logs) का विस्तार
अब तक हमने ‘लोलिता एक्सप्रेस’ के कुछ ही लॉग्स देखे हैं। लेकिन नए दस्तावेजों में उन उड़ानों का पूरा विवरण होने की उम्मीद है जो एपस्टीन के निजी द्वीप ‘लिटिल सेंट जेम्स’ तक जाती थीं। इसमें पायलटों के नोट्स, यात्रियों के हस्ताक्षर और ठहरने की अवधि का विवरण हो सकता है।
B. एफबीआई (FBI) और एसडीएनवाई (SDNY) की गुप्त रिपोर्ट
2019 में एपस्टीन की जेल में संदिग्ध मौत के बाद, एफबीआई ने उसके न्यूयॉर्क स्थित घर और द्वीप से भारी मात्रा में सामग्री जब्त की थी। इसमें हार्ड ड्राइव, सीसीटीवी फुटेज और व्यक्तिगत डायरियां शामिल थीं। अब तक इनका केवल एक छोटा हिस्सा ही अदालत में पेश किया गया था।
C. घिसलेन मैक्सवेल के बयान
एपस्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल, जो फिलहाल जेल में है, के कई बयान सीलबंद (Sealed) रखे गए थे। इन फाइल्स में उसके द्वारा लिए गए उन नामों का खुलासा हो सकता है जिन्होंने एपस्टीन के ‘सर्कल’ को संरक्षण दिया।
3. ‘क्लाइंट लिस्ट’ का रहस्य: कौन से नाम आ सकते हैं सामने?
इंटरनेट पर ‘क्लाइंट लिस्ट’ शब्द काफी वायरल है। हालांकि तकनीकी रूप से कोई ऐसी सूची नहीं है जिस पर ‘क्लाइंट’ लिखा हो, लेकिन एपस्टीन की ‘ब्लैक बुक’ (Black Book) और फ्लाइट लॉग्स से जो नाम जुड़ते हैं, उन्हें ही जनता ‘क्लाइंट लिस्ट’ मानती है।
- राजनीतिक दिग्गज: पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम अक्सर एपस्टीन के संदर्भ में लिए जाते रहे हैं। हालांकि दोनों ने किसी भी गलत कार्य से इनकार किया है, लेकिन इन नई फाइल्स में उनके दौरों की आवृत्ति और उद्देश्य स्पष्ट हो सकते हैं।
- ब्रिटिश शाही परिवार: प्रिंस एंड्रयू पहले ही इस मामले में अपनी छवि और सैन्य उपाधियां खो चुके हैं। फाइल्स में उनके खिलाफ और भी प्रत्यक्ष सबूत मिल सकते हैं।
- बिजनेस टाइकून: माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और लेस्ली वेक्सनर (विक्टोरिया सीक्रेट के पूर्व सीईओ) जैसे नामों पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। फाइल्स में उनके और एपस्टीन के वित्तीय संबंधों का ब्यौरा मिल सकता है।
4. लीक हुई 95,000 तस्वीरें: एक नया मोड़

डेडलाइन से ठीक पहले, हाउस ओवरसाइट कमेटी के माध्यम से कुछ चौंकाने वाली तस्वीरें लीक हुई हैं। यह तस्वीरें एपस्टीन के वर्जिन आइलैंड्स स्थित घर की हैं।
- घर का अजीबोगरीब सेटअप: तस्वीरों में डेंटिस्ट की कुर्सियां, विशेष रूप से डिजाइन किए गए मसाज रूम और दीवारों पर विचित्र कलाकृतियां दिखाई दी हैं।
- बच्चों के सामान: सबसे भयावह हिस्सा वह है जहां बच्चों के खिलौने और कपड़े उन जगहों पर पाए गए हैं जहां केवल वयस्कों की उपस्थिति होनी चाहिए थी।
- प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी: कुछ तस्वीरों में मशहूर हस्तियों को अनौपचारिक स्थितियों में एपस्टीन के साथ देखा गया है, जो उनके बीच के गहरे संबंधों की पुष्टि करते हैं।
5. रेडैक्शन (Redaction) और पारदर्शिता की चुनौती
पारदर्शिता एक्ट में एक ‘सुरक्षा कवच’ भी शामिल है। अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी के पास यह अधिकार है कि वह कुछ हिस्सों को ‘सेंसिटिव’ मानकर उन पर काली स्याही फेर दें (Redact कर दें)।
- पीड़ितों की सुरक्षा: कानून के अनुसार, किसी भी नाबालिग या पीड़ित की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। यह नैतिक और कानूनी रूप से सही है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना: आलोचकों को डर है कि सीआईए (CIA) या मोसाद (Mossad) जैसी खुफिया एजेंसियों के साथ एपस्टीन के कथित संबंधों को छिपाने के लिए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का तर्क दिया जा सकता है।
- चल रही जांच: यदि कोई फाइल किसी सक्रिय जांच का हिस्सा है, तो उसे अभी भी गुप्त रखा जा सकता है।
6. अमेरिकी राजनीति पर प्रभाव: 2026 के चुनावों की आहट
यह रिलीज ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका 2026 के मध्यावधि चुनावों की तैयारी कर रहा है।
- रिपब्लिकन रणनीति: ट्रंप प्रशासन इस रिलीज के जरिए यह दिखाना चाहता है कि वह ‘डीप स्टेट’ (Deep State) और भ्रष्ट अभिजात वर्ग के खिलाफ है।
- डेमोक्रेट्स की चिंता: कई डेमोक्रेटिक नेताओं के नाम इन फाइल्स में होने की संभावना है, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
- जनता का अविश्वास: यदि फाइल्स में बहुत अधिक काट-छांट की गई, तो जनता का अपनी न्याय प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है।
7. पीड़ितों का पक्ष: क्या उन्हें कभी न्याय मिलेगा?
इस पूरे शोर-शराबे में अक्सर पीड़ितों की आवाज दब जाती है। वर्जीनिया गिफ्रे जैसी महिलाओं ने सालों तक लड़ाई लड़ी है ताकि दुनिया को पता चल सके कि बंद दरवाजों के पीछे क्या हुआ था। https://www.google.com/search?q=https://www.reuters.com/world/us/countdown-disclosure-epstein-deadline-tests-us-transparency-2025-12-15/
इन फाइल्स की रिलीज उनके लिए केवल ‘गॉसिप’ नहीं, बल्कि उनकी पीड़ा की आधिकारिक पुष्टि है। यदि ये दस्तावेज नए मुकदमों का आधार बनते हैं, तो यह मानवाधिकारों की एक बड़ी जीत होगी।
8. निष्कर्ष: 19 दिसंबर के बाद की दुनिया
जेफरी एपस्टीन फाइल्स का सार्वजनिक होना केवल एक व्यक्ति के अपराधों की गाथा नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र का पर्दाफाश है जो शक्तिशाली लोगों को कानून से ऊपर रखता है। 19 दिसंबर 2025 के बाद, दुनिया भर के खोजी पत्रकार और कानूनी विशेषज्ञ इन फाइल्स का विश्लेषण करेंगे।
यह मुमकिन है कि रातों-रात कोई बड़ी गिरफ्तारी न हो, लेकिन सच्चाई का बाहर आना ही उन अपराधों को रोकने की दिशा में पहला कदम है जो अंधेरे में पनपते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या ‘क्लाइंट लिस्ट’ में भारत के भी किसी व्यक्ति का नाम है? अभी तक के फ्लाइट लॉग्स में कुछ भारतीय मूल के व्यापारियों के नाम देखे गए हैं, लेकिन किसी बड़े भारतीय राजनेता या अभिनेता का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
2. क्या सभी 10 लाख पन्ने एक साथ ऑनलाइन आएंगे? जी नहीं, न्याय विभाग इन्हें चरणों (Batches) में जारी कर सकता है, लेकिन आज की डेडलाइन तक मुख्य इंडेक्स और महत्वपूर्ण फाइलें सार्वजनिक होनी अनिवार्य हैं।
3. क्या डोनाल्ड ट्रंप का नाम इन फाइल्स में है? ट्रंप एपस्टीन को जानते थे और उनके विमान में भी देखे गए थे, लेकिन उन्होंने हमेशा कहा है कि उनके संबंध केवल सामाजिक थे और उन्होंने एपस्टीन के द्वीपों का दौरा कभी नहीं किया।
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