भारत, अपनी विविधता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ के त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे ही एक प्रमुख और अनूठा त्योहार है छठ पूजा। यह त्योहार सूर्य देव और छठी माता (छठी माईया) की आराधना का पर्व है। यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है। आगामी छठ पूजा 2025 की तैयारी भी श्रद्धा और उत्साह के साथ की जा रही है।
1. छठ पूजा क्या है?
छठ पूजा भारत के हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार सूर्य देवता (सूर्य भगवान) और छठी माता की आराधना के लिए मनाया जाता है। छठ पूजा मुख्यतः उत्तर भारत के बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यधिक लोकप्रिय है। इसके साथ ही नेपाल में भी इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। https://en.wikipedia.org/wiki/Chhath
छठ पूजा के दौरान श्रद्धालु नहाकर, व्रत रखकर, सूर्यास्त और सूर्य उदय के समय नदी, तालाब या जलाशय में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस पूजा का मूल उद्देश्य होता है सूर्य देव से स्वास्थ्य, समृद्धि, खुशहाली और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति।

छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है इसका व्रत और निर्जला उपवास, जिसमें श्रद्धालु 36 घंटे तक भोजन या जल नहीं लेते। यह तपस्या और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
2. छठ पूजा कब मनाई जाती है?
छठ पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को मनाई जाती है। आमतौर पर यह अक्टूबर-नवंबर महीने में आता है।
छठ पूजा का पर्व चार दिन चलता है, जो इस प्रकार हैं:
छठ पूजा 2025 के लिए भक्तजन विशेष तैयारी करते हैं और इसे मनाने के लिए उत्साहित रहते हैं।
इस वर्ष, छठ पूजा 2025 विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह अपने अद्वितीय रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ मनाई जाएगी।
- नहाय खाय
- यह छठ पूजा का पहला दिन होता है। इस दिन श्रद्धालु नहा-धोकर शुद्धता और पवित्रता के साथ पूजा की शुरुआत करते हैं। घर के आंगन या नदी किनारे जलाशय में स्नान करके व्रत की शुरुआत होती है।
- भोजन में आमतौर पर कदाही का शुद्ध शाकाहारी खाना बनाया जाता है, जिसमें सादा चावल, खीर, लौकी या लौकी का हलवा शामिल होते हैं।
- खरना
- छठ पूजा का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला रहते हैं और शाम को गुड़ और चावल की खीर से व्रत खोलते हैं। इसके बाद फिर निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।
- संध्या अर्घ्य
- तीसरे दिन श्रद्धालु सूर्यास्त के समय जलाशय या नदी किनारे जाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसे संध्या अर्घ्य कहते हैं।
- इस अवसर पर महिलाएं पारंपरिक साड़ी, श्रृंगार और फूल-माला पहनकर उपस्थित होती हैं।
- विशेष पूजा सामग्री जैसे ठेकुआ, नारियल, फल और चने अर्घ्य में चढ़ाए जाते हैं।
- उदया अर्घ्य
- चौथे और अंतिम दिन व्रती सूर्योदय के समय अर्घ्य देते हैं, जिसे उदया अर्घ्य कहते हैं।
- इसके बाद व्रत संपन्न होता है और श्रद्धालु भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
छठ पूजा का यह क्रम केवल भक्ति और तपस्या का प्रतीक नहीं है, बल्कि सूर्य की पूजा और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान भी है।

3. छठ पूजा कहां-कहां मनाई जाती है?
छठ पूजा मुख्यतः भारत और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है:
भारत में प्रमुख क्षेत्र
- बिहार – बिहार में छठ पूजा का विशेष महत्व है। यहाँ इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पटना, गया, और भागलपुर जैसे शहरों में यह विशेष रूप से प्रसिद्ध है।Bihar Tourism – Festivals
- उत्तर प्रदेश – पूर्वी यूपी के इलाके जैसे काशी, वाराणसी और गोरखपुर में भी छठ पूजा बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।
- झारखंड – रांची, जमशेदपुर और पलामू में यह पर्व अत्यधिक लोकप्रिय है।
- मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी – जहां भोजपुरी और मगही भाषी लोग रहते हैं, वहाँ भी छठ पूजा का आयोजन होता है।
नेपाल में
नेपाल में इसे छठ पर्व कहा जाता है। यहाँ इसे विशेष रूप से तराई क्षेत्र में मनाया जाता है, और यह नेपाल का राष्ट्रीय पर्व भी माना जाता है।Bihar Tourism – Festivals
छठ पूजा की विशेषता यह है कि इसे जलाशयों, नदी किनारों, तालाबों और पोखरों पर मनाया जाता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और संरक्षण भी होता है।
4. छठ पूजा का ऐतिहासिक महत्व
छठ पूजा का इतिहास कई सदियों पुराना है। इसका उल्लेख प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों और लोककथाओं में मिलता है।
प्राचीन कथाएँ
- एक कथा के अनुसार, छठी माता (उर्वशी या समृद्धि देवी) ने समुद्र मंथन के समय सूर्य देव की पूजा का महत्व बताया।
- एक अन्य कथा के अनुसार, रामायण काल में श्रीराम और माता सीता ने अयोध्या में सूर्य की पूजा करने के लिए व्रत रखा था, जिसे आज के छठ पूजा का प्रारंभ माना जाता है।
धार्मिक महत्व
- सूर्य देव का आराधना करना स्वास्थ्य और आयु बढ़ाने के लिए अनिवार्य माना गया है।
- व्रत और तपस्या करने से मनुष्य के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि आती है।
5. छठ पूजा का सांस्कृतिक प्रभाव
छठ पूजा केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, यह सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक भी है।

सामाजिक प्रभाव
- पारिवारिक एकता – छठ पूजा में पूरे परिवार के सदस्य मिलकर पूजा करते हैं। यह रिश्तों को मजबूत करता है।
- समुदाय में सहयोग – लोग मिलकर घाट सजाते हैं, अर्घ्य सामग्री तैयार करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।
- सांस्कृतिक पहचान – यह त्योहार बिहार, झारखंड और यूपी के लोगों की सांस्कृतिक पहचान को उजागर करता है।
सांस्कृतिक और पर्यावरणीय प्रभाव
- नदी, तालाब और जलाशय पर पूजा करने से लोगों को जल संरक्षण का महत्व समझ में आता है।
- छठ पूजा के दौरान स्थानीय भोजन, पारंपरिक गीत और लोक संस्कृति का पुनरुत्थान होता है।
- महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनती हैं और लोक गीत गाती हैं, जिससे सांस्कृतिक विरासत संरक्षित रहती है।
6. छठ पूजा की तैयारी और रीति-रिवाज
छठ पूजा में श्रद्धालुओं की तैयारी महीनों पहले से शुरू हो जाती है।
मुख्य तैयारी
- घाट की सफाई और सजावट – नदी किनारे या तालाब के आसपास पूजा स्थल को सजाया जाता है।
- पूजा सामग्री – ठेकुआ, फल, नारियल, चावल, गुड़ और पानी की विशेष तैयारी की जाती है।
- साफ-सफाई और व्रत की योजना – श्रद्धालु व्रत की अवधि में स्वास्थ्य और पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हैं।
मुख्य रीति-रिवाज
- नहाय-खाय और खरना: व्रत की शुरुआत और आधिकारिक भोजन।
- संध्या और उदया अर्घ्य: सूर्य देव को अर्घ्य देना।
- स्थानीय लोकगीत और भजन: पूजा के दौरान लोकगीत गाए जाते हैं।
7. छठ पूजा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्य
छठ पूजा के माध्यम से धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों का संचार होता है।Wikipedia – Chhath Puja
आध्यात्मिक मूल्य
- भक्ति और तपस्या – निर्जला व्रत और सूर्य देव की पूजा से आत्मिक शांति मिलती है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि – सूर्य देव की उपासना से शरीर और मन स्वस्थ रहता है।
सांस्कृतिक मूल्य
- लोकगीत और परंपरा – छठ पूजा के गीत और रीति-रिवाज पीढ़ी दर पीढ़ी चलते हैं।
- सामाजिक समरसता – सभी वर्ग के लोग मिलकर पूजा करते हैं।
- प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान – जल स्रोतों की पूजा से पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलता है।
छठ पूजा इस प्रकार धर्म, संस्कृति, परिवार और प्रकृति को जोड़ने वाला पर्व है।
8. निष्कर्ष
छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में अनुशासन, भक्ति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के संरक्षण का प्रतीक है। यह त्योहार बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के लोगों की सांस्कृतिक पहचान है।
वर्तमान समय में जब लोग तेजी से शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली की ओर बढ़ रहे हैं, छठ पूजा यह संदेश देती है कि भक्ति, परिवार और प्रकृति का सम्मान आज भी हमारे जीवन का मूल आधार है।
छठ पूजा हमें यह याद दिलाती है कि सूर्य और प्रकृति का सम्मान करना केवल धर्म का हिस्सा नहीं बल्कि जीवन और स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।
इसलिए, चाहे आप इसे धार्मिक रूप से मनाएं या सांस्कृतिक दृष्टि से, छठ पूजा हर भारतीय की जीवन यात्रा में एक अनमोल योगदान देती है।
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