बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स पर सियासी घमासान: जानिए किस पोल ने किसे दी कितनी सीटें

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म होने के बाद विभिन्न मीडिया संस्थानों और सर्वे एजेंसियों द्वारा जारी किए गए बिहार एग्जिट पोल्स (Exit Polls) ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। हालांकि, इन अनुमानों को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने सिरे से खारिज कर दिया है। एक तरफ जहाँ कई प्रमुख एग्जिट पोल्स में महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत या कड़ी टक्कर मिलती दिखी, वहीं तेजस्वी यादव ने इन अनुमानों पर सवाल उठाते हुए उन्हें अधिकारियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश बताया। तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल्स को क्यों नकारा? तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल्स के नतीजों को “मनोवैज्ञानिक प्रभाव” डालने वाला बताते हुए उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि ये आँकड़े मतदान प्रक्रिया समाप्त होने से पहले ही जारी किए गए थे। यादव ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “हम न झूठी उम्मीद में जीते हैं और न ही किसी गलतफहमी में। ये सर्वे सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा करने के लिए लाए जाते हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके।” उन्होंने एग्जिट पोल्स के सैंपल साइज़ और उनके मानदंडों को सार्वजनिक न किए जाने पर भी सवाल उठाया। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन ने वोट डालने वाले लोगों से फीडबैक लिया है, जो “बेहद सकारात्मक” है और इस बार बिहार में बदलाव निश्चित है। प्रमुख बिहार एग्जिट पोल्स के अनुमान (2020 के सन्दर्भ में) बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आँकड़ा 122 है। 2020 के चुनाव में, अधिकांश एग्जिट पोल्स में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को कांटे की टक्कर या महागठबंधन की जीत का अनुमान लगाया गया था। यहाँ विभिन्न प्रमुख एग्जिट पोल्स के अनुमान दिए गए हैं, जिन्होंने महागठबंधन (RJD+कांग्रेस+वाम दल) और NDA (JDU+BJP) के बीच मुकाबले का संकेत दिया था:https://www.hindustantimes.com/india-news/tejaswhi-yadav-rejects-bihar-election-exit-poll-projections-says-numbers-released-during-voting-for-phase-2-101762934124982.html#google_vignette न्यूज़ चैनल/एजेंसी महागठबंधन (RJD+) अनुमानित सीटें NDA (JDU+BJP) अनुमानित सीटें अन्य/LJP इंडिया टुडे-आज तक/एक्सिस माय इंडिया 139-161 69-91 6-10 रिपब्लिक टीवी-जन की बात 118-138 91-117 8-14 न्यूज 18-टुडेज़ चाणक्या 180 55 8 एबीपी न्यूज़-सी वोटर 108-131 104-128 5-11 टाइम्स नाउ-सी वोटर 120 116 7 दैनिक भास्कर/मैट्रिज (अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार) 70-91 145-167 0-10 बिहार चुनाव: एग्जिट पोल्स की चुनौती और राजनीतिक दांव यह चुनाव दोनों ही गठबंधनों के लिए महज़ सत्ता हासिल करने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाला था। एक ओर, NDA ने जहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ‘विकास’ और ‘सुशासन’ के ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा जताया, वहीं दूसरी ओर, युवा नेता तेजस्वी यादव ने ‘बेरोज़गारी’ और ‘सरकारी नौकरियों’ के मुद्दे को केंद्र में रखकर बड़ा दांव खेला। बिहार में एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर सवाल क्यों? बिहार की जटिल राजनीतिक और सामाजिक संरचना के कारण, यहाँ के एग्जिट पोल्स पर हमेशा से ही संदेह रहा है। राज्य में जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे इतनी तेज़ी से बदलते हैं कि चुनावी सर्वे अक्सर “साइलेंट वोटर” के मूड को भांपने में असफल हो जाते हैं। 2020 के चुनाव में भी, कई बड़े सर्वे (जैसे इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया) ने महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया था, लेकिन अंतिम नतीजों में NDA को मामूली अंतर से जीत मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि एग्जिट पोल के अनुमानों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। एग्जिट पोल के अनुमानों को ख़ारिज करने के बाद, तेजस्वी यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से मतगणना के दौरान चौकस रहने और मतगणना कक्ष से निकलने वाले हर परिणाम पर कड़ी नज़र रखने की अपील की थी। NDA का आत्मविश्वास वहीं दूसरी ओर, NDA खेमा, जिसने कुछ पोल्स में पिछड़ने का संकेत मिलने के बावजूद, अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा। भाजपा और JDU के नेताओं ने ज़ोर देकर कहा कि ज़मीनी हकीकत एग्जिट पोल से बिल्कुल अलग है। उनका मानना था कि लोगों ने जंगल राज की वापसी को सिरे से नकार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के विकास कार्यों पर भरोसा जताया है। अब, जबकि सभी की निगाहें गिनती की तारीख पर टिकी हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एग्जिट पोल्स सही साबित होते हैं, या फिर बिहार का “साइलेंट वोटर” इन सभी अनुमानों को गलत साबित कर एक चौंकाने वाला जनादेश देता है। निष्कर्ष: एग्जिट पोल्स के ये आँकड़े, खासकर आज तक-एक्सिस माय इंडिया और टुडेज़ चाणक्या के अनुमान, जिन्होंने महागठबंधन को ज़बरदस्त बढ़त दी थी, चुनाव के माहौल को गरमा रहे हैं। हालांकि, एग्जिट पोल्स हमेशा…

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“तूफान Montha : हर घंटे बुलेटिन का आदेश और पूर्ण केंद्रीय समर्थन का भरोसा”

तूफान Montha ने पूर्वी भारत में फिर से खतरा बढ़ा दिया है। बंगाल की खाड़ी में बन रहा यह सिस्टम अब तेज़ी से बढ़ रहा है और मौसम विभाग ने सतर्कता जारी की है।पूर्वी भारत की जिन्दगी फिर से एक बड़े मौसमीय खतरे के सामने है। बंगाल की खाड़ी में चल रहे निम्नचापीय सिस्टम ने तेज़ी से विकास पाई है और अब इसे तूफान ‘मोंथा’ के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी बीच, आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने अधिकारियों को प्रत्येक घंटे बुलेटिन जारी करने का आदेश दिया है जबकि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पूर्ण केंद्रीय समर्थन का आश्वासन दिया है। इस लेख में हम देखेंगे कि स्थिति क्या है, सरकारों ने क्या तैयारी की है, जनता को क्या करना चाहिए, तथा आगे क्या चुनौतियाँ सामने हो सकती हैं। Source http://(https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/chief-minister-chandrababu-orders-hourly-bulletins-on-cyclone-montha-pm-modi-assures-full-central-support/article70208110.ece) 1. तूफान Montha का मिजाज और ट्रैक मौसम विभागों की ताज़ा जानकारी के अनुसार, मोंथा अभी पश्चिम-दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में है और अनुमान है कि यह उत्तर-उत्तरी-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए आंध्र-प्रदेश के तटीय इलाके में 28 अक्टूबर शाम या रात तक लग सकते हैं। इसकी गति, तीरछाया, बारिश और समुद्री उठान बेहद गंभीर हो सकती है। तटीय जिलों में पहले ही हल्की हवाएँ और बारिश शुरू हो चुकी हैं। लेकिन इस तरह की शुरुआत कभी भी धोखे में डाल सकती है — असली झटका तूफान के चरम में आ सकता है। इसी कारण मुख्यमंत्री ने प्रत्येक घंटे बुलेटिन जारी करने का निर्देश दिया है ताकि परिस्थितियों में अचानक बदलाव को समय-समय पर जनता तक पहुँचाया जा सके। 2. राज्य सरकार की तैयारियाँ चुनौती को लेकर आंध्र-प्रदेश सरकार ने कई तरह की सक्रिय तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री नायडू ने शीघ्र समीक्षा बैठक बुलाई जिसमें राज्य रेयल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) के माध्यम से सभी विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “कोई जान नहीं जाए” इस लक्ष्य को लेकर काम किया जाना चाहिए। प्रमुख बिंदु: इन उपायों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ‘देखे-भाले’ मोड में काम कर रही है — यानी पूर्व सूचना, निरंतर निगरानी व समय से पहले राहत व बचाव व्यवस्था। https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/chief-minister-chandrababu-orders-hourly-bulletins-on-cyclone-montha-pm-modi-assures-full-central-support/article70208110.ece 3. केंद्र सरकार की भागीदारी तूफान Montha चुनौती इतनी बड़ी है कि राज्य-सरकार अकेले निपट नहीं सकती। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री नायडू से संपर्क किया और सुनिश्चित किया कि केंद्र पूरा सहयोग देगा। इस प्रकार: इस तरह, राज्य एवं केंद्र का समन्वय अधिक-से-अधिक प्रभावी होने का संकेत दे रहा है — जो बड़े आपदाओं में जीवन-रक्षा के लिए अहम होता है। 4. ‘हर घंटे बुलेटिन’ क्यों महत्वपूर्ण? तूफान की प्रकृति अत्यधिक अनिश्चित-प्रवण होती है। दिशानिर्देश, गति, हवाएँ, समुद्री उठान और वर्षा में अचानक बदलाव हो सकते हैं। इसी कारण हर घंटे बुलेटिन जारी करना – खासकर प्रभावित तटीय जिलों में – एक रणनीतिक कदम है। यह निम्नलिखित लाभ देता है: इसलिए, तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए बुलेटिन को नियमित रूप से फॉलो करना-बहुत आवश्यक हो जाता है। 5. आम नागरिकों के लिए तैयारी की चेक-लिस्ट अगर आप आंध्र-प्रदेश के तटीय जिलों (जैसे कृष्णा, गुंटूर, बापटला, एनटीआर, वेस्ट गोडावरी) में रहते हैं, तो नीचे दी गई तैयारियों को ध्यान से अपनाएँ: 6. सीख-अनुभव: पिछले तूफानों से आन्ध्र-प्रदेश पूर्व में कई बड़े तूफानों की मार झेल चुका है — जैसे Cyclone Hudhud (2014) जिसने भारी विनाश किया था। उस अनुभव से यह बातें सामने आई थीं: समय रहते चेतावनी, व्यापक लोकसंख्या को सुरक्षित स्थान पर ले जाना, बिजली-सड़क व संचार संरचनाओं को बचाना, स्वास्थ्य व सैनिटेशन की तैयारी। इस बार इन सब बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है। 7. चुनौतियाँ जो अभी बनी हुई हैं हालाँकि बेहतर तैयारी हो रही है, पर कुछ चुनौतियाँ अभी बनी-बनी हैं: 8. अगले 24-48 घंटे में क्या देखें 9. निष्कर्ष तूफान मोंथा हमारे तटवर्ती इलाकों के लिए गंभीर चुनौती है। राज्य सरकार द्वारा प्रति घंटा बुलेटिन देने का निर्णय और केंद्र की सहयोग-प्रेरित भूमिका इस बात का संकेत है कि तैयारियाँ पूरी-तैयार हैं। लेकिन यह केवल तैयारियों की शुरुआत है — नागरिकों का सतर्क होना, निर्देशों का पालन करना, समय रहते निर्णय लेना उतना ही महत्वपूर्ण है। तूफान आते समय “जान बचाना” सबसे महत्वपूर्ण है — इसलिए सूचना को नजरअंदाज़ न करें, अफवाहों से बचें, सरकारी बुलेटिन तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। अगले 48 घंटों में क्या होगा, इस पर हमारी आंखें टिकी हैं — आप भी तैयार रहें। Read this too https://theswadeshscoop.com/chhath-pooja-2025-itihas-mahatva-riti-rivaj-chhath-pooja-2025/ https://theswadeshscoop.com/punarjanm-ka-rahasya-rebirth/

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वडोदरा-आनंद कनेक्शन पर बने गंभीर पुल का हिस्सा गिरा | 9 जुलाई 2025

“वडोदरा गंभीर पुल हादसा” आज सुबह लगभग सुबह 7:30 बजे, पदरा-मुजपुर मार्ग पर बना लगभग 43 वर्ष पुराना गंभीर पुलअचानक बीच में से टूट गया। इस घटना में 2 से 9 मौतें और दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं indianexpress.com। कितने वाहन गिरे नदी में? घटना के परिणाम और रेस्क्यू ऑपरेशन ट्रैफिक डाइवर्जन की जानकारी घटना की संभावित वजह फ़ैसले-ख़ास संदेश निष्कर्ष गंभीर ब्रिज घटना एक सुनहरा अलार्म है कि पुराने पुलों की नियमित जाँच, रुक-रुककर रख-रखाव और शीघ्र मरम्मत का कार्य जीवनरक्षक हो सकता है। वडोदरा—आनंद कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण कनेक्शन है, और इस घटना ने राज्य-बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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