मोहनजो‑दड़ो से पहले: भारत की सबसे प्राचीन मानव बस्तियों की कहानी

– The Swadesh Scoop भारत की सभ्यता का इतिहास प्राचीन और जटिल है। दशकों तक यह माना जाता रहा कि भारतीय सभ्यता की शुरुआत मोहनजो‑दड़ो (Mohenjo‑Daro) और हड़प्पा (Harappa) जैसी महान शहरी बस्तियों से ही हुई थी। लेकिन जैसे-जैसे पुरातत्व और वैज्ञानिक तिथि-निर्धारण (dating) की तकनीकें उन्नत हुईं, विशेषज्ञों ने इस धारणा को चुनौती दी और दिखाया कि भारत में सभ्यता की कहानी कहीं अधिक प्राचीन और निरंतर है। यह लेख बड़ी विस्तार से उन प्राचीन बस्तियों, खोजकर्ताओं, तिथि-निर्धारण के परिणामों, वैज्ञानिक शोध और शोध पत्रों के आधार पर भारत की सभ्यता का वास्तविक स्वरूप प्रस्तुत करता है, ताकि पाठक स्पष्ट रूप से समझ सकें कि इतिहास की समझ कैसे बदल रही है। मोहनजो‑दड़ो: इतिहास की ‘पहली’ सभ्यता? मोहनजो‑दड़ो और हड़प्पा, सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization — IVC) के सबसे प्रसिद्ध केंद्र हैं, जिनकी तिथियाँ लगभग 3300 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच हैं। यह वह दौर है जब बड़े शहर, उन्नत जल-निकासी और व्यवस्थित नगर योजना विकसित हुई। (msuniv.ac.in) मोहनजो‑दड़ो का पहला खाका 1911-12 में डी. आर. हंडरकर (D. R. Handarkar) ने देखा था पर उन्होंने इसे प्राचीन नहीं माना; बाद में आर. डी. बनर्जी (R. D. Banerji) ने इसे पहचान कर 1920 के दशक में पुरातत्व जगत में प्रवेश दिलाया। (fullhousetourism.com) लेकिन यह केवल उन्नत शहरों की शुरुआत का प्रतीक है — सभ्यता की शुरुआत नहीं। मेरगढ़ (Mehrgarh): भारत के पहले किसान और बस्ती जीवन की शुरुआत खोज और स्थान मेरगढ़, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के Kacchi Plain में स्थित है। इसे 1974 में फ्रांसीसी पुरातत्वविदों Jean‑François Jarrige और Catherine Jarrige की टीम ने खोजा। (en.wikipedia.org) काल और तिथि मेरगढ़ लगभग 7000 ईसा पूर्व से लेकर 2500 ईसा पूर्व तक लगातार बसा रहा। शुरुआती बस्तियाँ लगभग 7000–5250 ईसा पूर्व के हैं। (en.wikipedia.org) जीवनशैली और तकनीक मेरगढ़ के निवासी मिट्टी के घर बनाते थे, अनाज भंडारित करते थे, स्थानीय तांबे के अयस्क से उपकरण बनाते थे और छोटे-बड़े बर्तन बनाते थे। यहाँ गेहूँ, छह-कड़ी जौ और जुगूबे जैसी फसलों का प्रमाण मिला है, और भेड़, बकरी तथा पशुधन पर आधारित पशुपालन के निशान मिले हैं। बाद के काल में लोग फ्लिंट नक्काशी, छाल कार्य, मोती निर्माण और धातु कार्य में कौशल विकसित कर चुके थे। (en.wikipedia.org) महत्व मेरगढ़ ने मानव इतिहास में स्थायी बस्ती और कृषि जीवन की नींव रखी। भिरराना (Bhirrana): भारत का सबसे पुराना ज्ञात प्राचीन स्थल खोज और सर्वेक्षण भिरराना, हरियाणा के फ़तेहाबाद जिले में स्थित है। यह स्थल 2003–2006 के दौरान खुदाई के दौरान प्रमुख पुरातत्विक स्थल के रूप में सामने आया। (en.wikipedia.org) सबसे पुराना प्रमाणित तिथि भिरराना में चारकोल सैंपल और रेडियो-कार्बन तिथि-निर्धारण से पता चला कि यह लगभग 7570–6200 ईसा पूर्व का है। (timesofindia.indiatimes.com) भिरराना की परतें और निरंतरता भिरराना के निचले स्तरों में Hakra Ware संस्कृति के अवशेष मिले। उच्च स्तरों में प्रारंभिक गाँव से लेकर मध्यम और पूर्ण-हड़प्पन अवधि तक की संरचनाएँ दिखाई देती हैं। (en.wikipedia.org) भिरराना की विशेषताएँ मिट्टी के घर, सीधी सड़कें, टेराकोटा बर्तन, तांबे के उपकरण, मोती, shell आभूषण, और खेती के प्रमाण मिले। राखीगढ़ी (Rakhigarhi): सबसे बड़ा आदिवासी-पूर्व-हड़प्पन नगर खोज और खुदाई राखीगढ़ी, हरियाणा के हिसार जिले में स्थित है। इसकी खुदाई 1963 से जारी है। (en.wikipedia.org) क्षेत्रीय विस्तार और महत्व राखीगढ़ी का क्षेत्र लगभग 300-350 हेक्टेयर तक फैला हुआ है। (livemint.com) काल और परतें • Pre-Harappan (6000?/4600-3300 ईसा पूर्व)• Early Harappan (3300–2600 ईसा पूर्व)• Mature Harappan (2600–1900 ईसा पूर्व) DNA शोध और ऐतिहासिक जानकारी Rakhigarhi से प्राप्त DNA विश्लेषण से पता चला कि यह लोग स्थानीय दक्षिण एशियाई वंश के थे। (subhashkak.medium.com) अन्य स्थल और निरंतरता • कुणाल (Haryana): भिरराना के समकालीन। (en.wikipedia.org)• Sothi (Rajasthan): 4600 ईसा पूर्व के अवशेष। (en.wikipedia.org) विज्ञान और तिथि-निर्धारण • Carbon-14 (C‑14) डेटिंग• Stratigraphy• DNA अनुक्रमण (sequencing) इन तकनीकों से पता चलता है कि मानव सभ्यता भारत में लगातार विकसित हुई, न कि अचानक आई। निष्कर्ष: इतिहास का नया परिप्रेक्ष्य • भारत में मानव-आधारित कृषि और स्थायी बस्ती का विकास हजारों साल पहले हुआ।• भिरराना और राखीगढ़ी जैसी साइट्स यह दिखाती हैं कि सभ्यता की निरंतरता थी।• DNA और वैज्ञानिक डेटिंग सिद्धांतों से पता चलता है कि सभ्यता स्थानीय थी। इतिहास को अब केवल मोहनजो‑दड़ो से शुरू नहीं देखा जा सकता। यह एक लंबी, समृद्ध मानव विकास की कथा है। संदर्भ सूची — References Read this : प्राचीन सभ्यताओं का खोया हुआ ज्ञान: क्या हम उसे वापस पा सकते हैं? http://top-5-cars-under-5-lakh-india

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Gold Price Hit Record High: सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल, $4383 के पार पहुंचा पीला मेटल; जानें इस तेजी के पीछे के 5 बड़े कारण

दिनांक: 22 दिसंबर, 2025 स्थान: नई दिल्ली/मुंबई भारतीय और वैश्विक बाजार में आज सोने की कीमतों ने एक नया इतिहास रच दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया और अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सोने की हाजिर कीमत (Spot Gold) $4,383.76 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई है। भारत में भी, MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना ₹1,34,000 के स्तर को पार करते हुए नए शिखर पर पहुंच गया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर सोने की कीमतों में यह ‘तूफानी’ तेजी क्यों आ रही है और आने वाले दिनों में यह कहां तक जा सकती है। सोने (Gold) की कीमतों में तेजी के 5 प्रमुख कारण (What’s Driving the Rally?) 1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की उदार नीति (Dovish Fed Policy) अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) ने हाल ही में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की कटौती की है, जिससे फंड रेट 3.50%–3.75% के दायरे में आ गया है। जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो डॉलर कमजोर होता है और सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों (Non-yielding assets) का आकर्षण बढ़ जाता है।http://सोना-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, जानें आज आपके शहर का भाव और तेजी की मुख्य वजहें 2. गहराता भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) दिसंबर 2025 में वैश्विक मंच पर अस्थिरता बढ़ी है। मिडिल ईस्ट में नए तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध का लंबा खिंचना और हाल ही में वेनेजुएला पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश (Safe-haven) की ओर धकेल दिया है। 3. भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट (Weakening Indian Rupee) भारतीय बाजार में सोने की कीमत केवल वैश्विक कीमतों पर नहीं, बल्कि डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर भी निर्भर करती है। दिसंबर 2025 में रुपया ₹90.83 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया है। रुपये की कमजोरी के कारण भारत में सोने का आयात महंगा हो गया है, जिससे घरेलू कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। 4. सेंट्रल बैंकों द्वारा भारी खरीदारी (Central Bank Buying) दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेष रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाएं, अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को ‘डी-डॉलराइजेशन’ (De-dollarization) की प्रक्रिया के तहत Gold में बदल रहे हैं। आरबीआई (RBI) भी लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहा है, जिससे कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। 5. ईटीएफ (ETF) और संस्थागत निवेश में उछाल पिछले कुछ महीनों में Gold ईटीएफ (Gold ETFs) में निवेश का प्रवाह (Inflow) काफी बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर ईटीएफ होल्डिंग्स 98 मिलियन औंस के पार पहुंच गई हैं, जो अक्टूबर 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। रियल-टाइम अपडेट: भारत के प्रमुख शहरों में आज का भाव (22 Dec 2025) नीचे दी गई तालिका में भारत के विभिन्न शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के ताजा भाव दिए गए हैं: शहर 24 कैरेट Gold (प्रति 10 ग्राम) 22 कैरेट Gold (प्रति 10 ग्राम) नई दिल्ली ₹1,45,745 ₹1,34,270 मुंबई ₹1,45,320 ₹1,34,170 कोलकाता ₹1,44,060 ₹1,34,200 चेन्नई ₹1,39,110 ₹1,28,505 बेंगलुरु ₹1,38,825 ₹1,28,505 नोट: ये कीमतें बाजार की स्थितियों और स्थानीय करों (GST) के आधार पर भिन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों की राय: क्या अभी निवेश करना सही है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में तेजी का यह रुख 2026 तक जारी रह सकता है। J.P. Morgan की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोना $5,000 प्रति औंस के स्तर को छू सकता है। हालांकि, तकनीकी संकेतकों (RSI) के अनुसार बाजार फिलहाल ‘ओवरबॉट’ (Overbought) स्थिति में है, इसलिए निवेशकों को किसी भी छोटी गिरावट (Correction) पर खरीदारी करने की सलाह दी जाती है। निवेशकों के लिए टिप्स: निष्कर्ष दिसंबर 2025 सोने के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। अनिश्चित वैश्विक आर्थिक स्थितियों और कमजोर रुपये ने सोने को निवेश का सबसे मजबूत विकल्प बना दिया है। यदि आप निवेश की योजना बना रहे हैं, तो बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करें। Read This : ICICI Prudential AMC Stock Listing: NSE पर 20% प्रीमियम के साथ धमाकेदार एंट्री, क्या निवेशकों को अब और रुकना चाहिए?

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भारत की हवाई यात्रा का महासंकट: इंडिगो का ‘ऑपरेशनल मेलडाउन’ और पायलटों के आराम की कीमत – एक विस्तृत विश्लेषण

भारत, जिसकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है और जहाँ घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या हर साल नए रिकॉर्ड छूती है, के लिए दिसंबर 2025 का पहला सप्ताह एक काला अध्याय लेकर आया। देश की सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली एयरलाइन, इंडिगो (IndiGo), अभूतपूर्व ‘ऑपरेशनल मेलडाउन’ (परिचालन पतन) के भंवर में फंस गई। यह संकट इतना विशाल था कि देश के लगभग सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर अराजकता फैल गई, सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं और हज़ारों यात्री असहाय होकर फंसे रह गए। यह केवल उड़ानों के रद्द होने का मामला नहीं था; यह गलत प्रबंधन (Mismanagement), नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) में चूक और लाभ-उन्मुख रणनीति (Lean Manpower Strategy) के कारण पैदा हुए एक गहरे संकट का स्पष्ट प्रमाण था। इस आलेख में, हम इस महासंकट की तह तक जाएंगे। हम न केवल घटनाक्रम को समझेंगे, बल्कि सरकारी प्रतिक्रिया (DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय), इंडिगो के स्पष्टीकरण और सबसे महत्वपूर्ण, इस पूरे घटनाक्रम के मूल कारण—फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) नियमों को लागू करने में हुई भारी चूक—का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। I. संकट का केंद्र: जब उड़ानें बस रुक गईं A. अभूतपूर्व अराजकता का दृश्य (The Scene of Unprecedented Chaos) दिसंबर 2025 की शुरुआत में, विशेष रूप से 5 और 6 दिसंबर को, भारत की हवाई यात्रा प्रणाली लगभग ध्वस्त हो गई। देश के लगभग 60% घरेलू बाज़ार पर कब्ज़ा रखने वाली इंडिगो ने एक ही दिन में 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं। यह संकट दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में सबसे ज़्यादा गंभीर था। दिल्ली हवाई अड्डे से इंडिगो की सभी उड़ानें एक दिन के लिए पूरी तरह से निलंबित रहीं, क्योंकि एयरलाइन अपने क्रू को सही स्थानों पर तैनात करने और रोस्टर को पुनर्व्यवस्थित करने की “रिबूट” प्रक्रिया में लगी हुई थी। कल्पना कीजिए, देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर, त्योहारी और विवाह के सीज़न के चरम पर, अचानक एक प्रमुख एयरलाइन के सभी प्रस्थान रद्द हो जाते हैं। यात्री घंटों लाइन में खड़े रहे, उन्हें अपनी यात्रा की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा और अक्सर एयरलाइन कर्मचारियों से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। यात्रियों की दुर्दशा मार्मिक थी। सोशल मीडिया पर आक्रोश का माहौल था। लोग भोजन, पानी और आवास की कमी की शिकायत कर रहे थे। वृद्ध नागरिक (Senior Citizens), बीमार लोग (Patients) और छात्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए, जिनकी आवश्यक यात्रा योजनाएं एक झटके में तबाह हो गईं। यह संकट उस समय आया जब नागरिक उड्डयन उद्योग पहले से ही भारी यात्री यातायात और मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिसने इस समस्या को और विकराल बना दिया। B. यात्रियों का विरोध और एयरलाइन का डगमगाता प्रदर्शन कई हवाई अड्डों पर, जैसे कि श्रीनगर और जम्मू, फंसे हुए यात्रियों ने विरोध प्रदर्शन किया, क्योंकि उन्हें अंतिम समय में अपनी उड़ानें रद्द होने की सूचना मिली थी और एयरलाइन ने उनकी संकट कॉल का जवाब देने में कथित तौर पर विफल रही थी। संकट के चरम पर, इंडिगो का ऑन-टाइम प्रदर्शन (OTP) 8.5% तक गिर गया, जबकि यह आमतौर पर 80% से ऊपर रहता है। यह प्रदर्शन किसी भी एयरलाइन के लिए एक शर्मनाक पतन था, जिसने इंडिगो की 19 वर्षों से बनी विश्वसनीयता को गंभीर रूप से हिला दिया, जैसा कि CEO ने स्वयं स्वीकार किया। II. संकट का मूल कारण: FDTL नियमों की अनदेखी और प्रबंधन की चूक संकट के तुरंत बाद, इंडिगो ने शुरुआत में इसे “तकनीकी गड़बड़ियों, शीतकालीन शेड्यूल परिवर्तनों, खराब मौसम और हवाई क्षेत्र में बढ़ी हुई भीड़” सहित “अनेक अप्रत्याशित परिचालन चुनौतियों” का परिणाम बताया। हालांकि, सरकार और नियामक संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की गहन जांच के बाद असली कारण सामने आया: A. FDTL नियमों में बदलाव और क्रू की कमी संकट का मुख्य कारण पायलटों के लिए संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) नियमों को लागू करने में एयरलाइन की विफलता थी। FDTL नियम क्या हैं? DGCA ने पायलटों में थकान (Fatigue) को कम करने और उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2024 में FDTL नियमों में संशोधन किया था, जिसे कोर्ट के निर्देश के बाद दो चरणों में लागू किया गया था (पहला चरण जुलाई 2025 में और दूसरा चरण 1 नवंबर 2025 को)। इन नियमों के प्रमुख बदलावों में शामिल थे: ये नियम, जो पायलटों की सुरक्षा और आराम के लिए महत्वपूर्ण थे, का सीधा मतलब था कि एयरलाइन को अपने मौजूदा शेड्यूल को बनाए रखने के लिए अधिक पायलटों की आवश्यकता होगी। B. इंडिगो का कुप्रबंधन (Mismanagement) इंडिगो, जो अपने कम लागत वाले वाहक मॉडल के लिए…

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बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स पर सियासी घमासान: जानिए किस पोल ने किसे दी कितनी सीटें

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म होने के बाद विभिन्न मीडिया संस्थानों और सर्वे एजेंसियों द्वारा जारी किए गए बिहार एग्जिट पोल्स (Exit Polls) ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। हालांकि, इन अनुमानों को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने सिरे से खारिज कर दिया है। एक तरफ जहाँ कई प्रमुख एग्जिट पोल्स में महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत या कड़ी टक्कर मिलती दिखी, वहीं तेजस्वी यादव ने इन अनुमानों पर सवाल उठाते हुए उन्हें अधिकारियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश बताया। तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल्स को क्यों नकारा? तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल्स के नतीजों को “मनोवैज्ञानिक प्रभाव” डालने वाला बताते हुए उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि ये आँकड़े मतदान प्रक्रिया समाप्त होने से पहले ही जारी किए गए थे। यादव ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “हम न झूठी उम्मीद में जीते हैं और न ही किसी गलतफहमी में। ये सर्वे सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा करने के लिए लाए जाते हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके।” उन्होंने एग्जिट पोल्स के सैंपल साइज़ और उनके मानदंडों को सार्वजनिक न किए जाने पर भी सवाल उठाया। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन ने वोट डालने वाले लोगों से फीडबैक लिया है, जो “बेहद सकारात्मक” है और इस बार बिहार में बदलाव निश्चित है। प्रमुख बिहार एग्जिट पोल्स के अनुमान (2020 के सन्दर्भ में) बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आँकड़ा 122 है। 2020 के चुनाव में, अधिकांश एग्जिट पोल्स में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को कांटे की टक्कर या महागठबंधन की जीत का अनुमान लगाया गया था। यहाँ विभिन्न प्रमुख एग्जिट पोल्स के अनुमान दिए गए हैं, जिन्होंने महागठबंधन (RJD+कांग्रेस+वाम दल) और NDA (JDU+BJP) के बीच मुकाबले का संकेत दिया था:https://www.hindustantimes.com/india-news/tejaswhi-yadav-rejects-bihar-election-exit-poll-projections-says-numbers-released-during-voting-for-phase-2-101762934124982.html#google_vignette न्यूज़ चैनल/एजेंसी महागठबंधन (RJD+) अनुमानित सीटें NDA (JDU+BJP) अनुमानित सीटें अन्य/LJP इंडिया टुडे-आज तक/एक्सिस माय इंडिया 139-161 69-91 6-10 रिपब्लिक टीवी-जन की बात 118-138 91-117 8-14 न्यूज 18-टुडेज़ चाणक्या 180 55 8 एबीपी न्यूज़-सी वोटर 108-131 104-128 5-11 टाइम्स नाउ-सी वोटर 120 116 7 दैनिक भास्कर/मैट्रिज (अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार) 70-91 145-167 0-10 बिहार चुनाव: एग्जिट पोल्स की चुनौती और राजनीतिक दांव यह चुनाव दोनों ही गठबंधनों के लिए महज़ सत्ता हासिल करने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाला था। एक ओर, NDA ने जहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ‘विकास’ और ‘सुशासन’ के ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा जताया, वहीं दूसरी ओर, युवा नेता तेजस्वी यादव ने ‘बेरोज़गारी’ और ‘सरकारी नौकरियों’ के मुद्दे को केंद्र में रखकर बड़ा दांव खेला। बिहार में एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर सवाल क्यों? बिहार की जटिल राजनीतिक और सामाजिक संरचना के कारण, यहाँ के एग्जिट पोल्स पर हमेशा से ही संदेह रहा है। राज्य में जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे इतनी तेज़ी से बदलते हैं कि चुनावी सर्वे अक्सर “साइलेंट वोटर” के मूड को भांपने में असफल हो जाते हैं। 2020 के चुनाव में भी, कई बड़े सर्वे (जैसे इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया) ने महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया था, लेकिन अंतिम नतीजों में NDA को मामूली अंतर से जीत मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि एग्जिट पोल के अनुमानों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। एग्जिट पोल के अनुमानों को ख़ारिज करने के बाद, तेजस्वी यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से मतगणना के दौरान चौकस रहने और मतगणना कक्ष से निकलने वाले हर परिणाम पर कड़ी नज़र रखने की अपील की थी। NDA का आत्मविश्वास वहीं दूसरी ओर, NDA खेमा, जिसने कुछ पोल्स में पिछड़ने का संकेत मिलने के बावजूद, अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा। भाजपा और JDU के नेताओं ने ज़ोर देकर कहा कि ज़मीनी हकीकत एग्जिट पोल से बिल्कुल अलग है। उनका मानना था कि लोगों ने जंगल राज की वापसी को सिरे से नकार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के विकास कार्यों पर भरोसा जताया है। अब, जबकि सभी की निगाहें गिनती की तारीख पर टिकी हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एग्जिट पोल्स सही साबित होते हैं, या फिर बिहार का “साइलेंट वोटर” इन सभी अनुमानों को गलत साबित कर एक चौंकाने वाला जनादेश देता है। निष्कर्ष: एग्जिट पोल्स के ये आँकड़े, खासकर आज तक-एक्सिस माय इंडिया और टुडेज़ चाणक्या के अनुमान, जिन्होंने महागठबंधन को ज़बरदस्त बढ़त दी थी, चुनाव के माहौल को गरमा रहे हैं। हालांकि, एग्जिट पोल्स हमेशा…

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“तूफान Montha : हर घंटे बुलेटिन का आदेश और पूर्ण केंद्रीय समर्थन का भरोसा”

तूफान Montha ने पूर्वी भारत में फिर से खतरा बढ़ा दिया है। बंगाल की खाड़ी में बन रहा यह सिस्टम अब तेज़ी से बढ़ रहा है और मौसम विभाग ने सतर्कता जारी की है।पूर्वी भारत की जिन्दगी फिर से एक बड़े मौसमीय खतरे के सामने है। बंगाल की खाड़ी में चल रहे निम्नचापीय सिस्टम ने तेज़ी से विकास पाई है और अब इसे तूफान ‘मोंथा’ के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी बीच, आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने अधिकारियों को प्रत्येक घंटे बुलेटिन जारी करने का आदेश दिया है जबकि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पूर्ण केंद्रीय समर्थन का आश्वासन दिया है। इस लेख में हम देखेंगे कि स्थिति क्या है, सरकारों ने क्या तैयारी की है, जनता को क्या करना चाहिए, तथा आगे क्या चुनौतियाँ सामने हो सकती हैं। Source http://(https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/chief-minister-chandrababu-orders-hourly-bulletins-on-cyclone-montha-pm-modi-assures-full-central-support/article70208110.ece) 1. तूफान Montha का मिजाज और ट्रैक मौसम विभागों की ताज़ा जानकारी के अनुसार, मोंथा अभी पश्चिम-दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में है और अनुमान है कि यह उत्तर-उत्तरी-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए आंध्र-प्रदेश के तटीय इलाके में 28 अक्टूबर शाम या रात तक लग सकते हैं। इसकी गति, तीरछाया, बारिश और समुद्री उठान बेहद गंभीर हो सकती है। तटीय जिलों में पहले ही हल्की हवाएँ और बारिश शुरू हो चुकी हैं। लेकिन इस तरह की शुरुआत कभी भी धोखे में डाल सकती है — असली झटका तूफान के चरम में आ सकता है। इसी कारण मुख्यमंत्री ने प्रत्येक घंटे बुलेटिन जारी करने का निर्देश दिया है ताकि परिस्थितियों में अचानक बदलाव को समय-समय पर जनता तक पहुँचाया जा सके। 2. राज्य सरकार की तैयारियाँ चुनौती को लेकर आंध्र-प्रदेश सरकार ने कई तरह की सक्रिय तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री नायडू ने शीघ्र समीक्षा बैठक बुलाई जिसमें राज्य रेयल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) के माध्यम से सभी विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “कोई जान नहीं जाए” इस लक्ष्य को लेकर काम किया जाना चाहिए। प्रमुख बिंदु: इन उपायों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ‘देखे-भाले’ मोड में काम कर रही है — यानी पूर्व सूचना, निरंतर निगरानी व समय से पहले राहत व बचाव व्यवस्था। https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/chief-minister-chandrababu-orders-hourly-bulletins-on-cyclone-montha-pm-modi-assures-full-central-support/article70208110.ece 3. केंद्र सरकार की भागीदारी तूफान Montha चुनौती इतनी बड़ी है कि राज्य-सरकार अकेले निपट नहीं सकती। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री नायडू से संपर्क किया और सुनिश्चित किया कि केंद्र पूरा सहयोग देगा। इस प्रकार: इस तरह, राज्य एवं केंद्र का समन्वय अधिक-से-अधिक प्रभावी होने का संकेत दे रहा है — जो बड़े आपदाओं में जीवन-रक्षा के लिए अहम होता है। 4. ‘हर घंटे बुलेटिन’ क्यों महत्वपूर्ण? तूफान की प्रकृति अत्यधिक अनिश्चित-प्रवण होती है। दिशानिर्देश, गति, हवाएँ, समुद्री उठान और वर्षा में अचानक बदलाव हो सकते हैं। इसी कारण हर घंटे बुलेटिन जारी करना – खासकर प्रभावित तटीय जिलों में – एक रणनीतिक कदम है। यह निम्नलिखित लाभ देता है: इसलिए, तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए बुलेटिन को नियमित रूप से फॉलो करना-बहुत आवश्यक हो जाता है। 5. आम नागरिकों के लिए तैयारी की चेक-लिस्ट अगर आप आंध्र-प्रदेश के तटीय जिलों (जैसे कृष्णा, गुंटूर, बापटला, एनटीआर, वेस्ट गोडावरी) में रहते हैं, तो नीचे दी गई तैयारियों को ध्यान से अपनाएँ: 6. सीख-अनुभव: पिछले तूफानों से आन्ध्र-प्रदेश पूर्व में कई बड़े तूफानों की मार झेल चुका है — जैसे Cyclone Hudhud (2014) जिसने भारी विनाश किया था। उस अनुभव से यह बातें सामने आई थीं: समय रहते चेतावनी, व्यापक लोकसंख्या को सुरक्षित स्थान पर ले जाना, बिजली-सड़क व संचार संरचनाओं को बचाना, स्वास्थ्य व सैनिटेशन की तैयारी। इस बार इन सब बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है। 7. चुनौतियाँ जो अभी बनी हुई हैं हालाँकि बेहतर तैयारी हो रही है, पर कुछ चुनौतियाँ अभी बनी-बनी हैं: 8. अगले 24-48 घंटे में क्या देखें 9. निष्कर्ष तूफान मोंथा हमारे तटवर्ती इलाकों के लिए गंभीर चुनौती है। राज्य सरकार द्वारा प्रति घंटा बुलेटिन देने का निर्णय और केंद्र की सहयोग-प्रेरित भूमिका इस बात का संकेत है कि तैयारियाँ पूरी-तैयार हैं। लेकिन यह केवल तैयारियों की शुरुआत है — नागरिकों का सतर्क होना, निर्देशों का पालन करना, समय रहते निर्णय लेना उतना ही महत्वपूर्ण है। तूफान आते समय “जान बचाना” सबसे महत्वपूर्ण है — इसलिए सूचना को नजरअंदाज़ न करें, अफवाहों से बचें, सरकारी बुलेटिन तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। अगले 48 घंटों में क्या होगा, इस पर हमारी आंखें टिकी हैं — आप भी तैयार रहें। Read this too https://theswadeshscoop.com/chhath-pooja-2025-itihas-mahatva-riti-rivaj-chhath-pooja-2025/ https://theswadeshscoop.com/punarjanm-ka-rahasya-rebirth/

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वडोदरा-आनंद कनेक्शन पर बने गंभीर पुल का हिस्सा गिरा | 9 जुलाई 2025

“वडोदरा गंभीर पुल हादसा” आज सुबह लगभग सुबह 7:30 बजे, पदरा-मुजपुर मार्ग पर बना लगभग 43 वर्ष पुराना गंभीर पुलअचानक बीच में से टूट गया। इस घटना में 2 से 9 मौतें और दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं indianexpress.com। कितने वाहन गिरे नदी में? घटना के परिणाम और रेस्क्यू ऑपरेशन ट्रैफिक डाइवर्जन की जानकारी घटना की संभावित वजह फ़ैसले-ख़ास संदेश निष्कर्ष गंभीर ब्रिज घटना एक सुनहरा अलार्म है कि पुराने पुलों की नियमित जाँच, रुक-रुककर रख-रखाव और शीघ्र मरम्मत का कार्य जीवनरक्षक हो सकता है। वडोदरा—आनंद कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण कनेक्शन है, और इस घटना ने राज्य-बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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