हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र: एक सुनहरा सफर

धर्मेंद्र सिंह देओल, जिन्हें दुनिया धर्मेंद्र के नाम से जानती है, भारतीय सिनेमा के उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग, आकर्षक व्यक्तित्व और सरल स्वभाव से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया है। उनका फ़िल्मी सफर संघर्ष, सफलता और शानदार अदाकारी की एक ऐसी गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।https://nl.wikipedia.org/wiki/Dharmendra स्वास्थ्य की वर्तमान स्थिति पिछले कुछ समय से हिंदी सिनेमा के प्रिय कलाकार धर्मेंद्र जी के स्वास्थ्य को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें मीडिया में छाई रही हैं। हालाँकि, उनके परिवार, विशेष रूप से उनकी पत्नी हेमा मालिनी और बच्चों ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि धर्मेंद्र जी स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और उनकी हालत स्थिर है। फैंस और शुभचिंतक उनके जल्द और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। शुरुआती जीवन और फ़िल्मी सफर की शुरुआत धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के साहनेवाल गाँव में हुआ था। फ़िल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले, उनका जीवन गाँव के सीधे-सादे माहौल में बीता। उनका फ़िल्मी सफर किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। वह एक फ़िल्मी पत्रिका द्वारा आयोजित ‘न्यू टैलेंट हंट’ प्रतियोगिता के विजेता बने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई आ गए। उन्होंने 1960 में फ़िल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती संघर्ष के बाद, 60 के दशक के अंत तक, उन्होंने खुद को एक रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित किया। उल्लेखनीय कार्य और विविध भूमिकाएँ धर्मेंद्र जी का करियर उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है। उन्होंने न केवल एक रोमांटिक हीरो के रूप में, बल्कि एक्शन स्टार और बेहतरीन कॉमेडियन के रूप में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 300 से अधिक फ़िल्मों में काम किया है और लगभग हर बड़े कलाकार और निर्देशक के साथ काम किया है। उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री, विशेषकर हेमा मालिनी के साथ, बेहद लोकप्रिय रही। पारिवारिक जीवन धर्मेंद्र जी का पारिवारिक जीवन भी फ़िल्मी दुनिया जितना ही चर्चा में रहा है। उनका परिवार कई पीढ़ियों से फ़िल्म उद्योग में सक्रिय है, जिसमें उनके बेटे और पोते-पोतियाँ भी शामिल हैं, जो भारतीय सिनेमा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। 🏆 सम्मान और पुरस्कार धर्मेंद्र जी को उनके शानदार करियर के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा गया है, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं: धर्मेंद्र जी केवल एक अभिनेता नहीं हैं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक युग का प्रतीक हैं। उनका बेजोड़ अभिनय, ज़मीन से जुड़ा व्यक्तित्व और दर्शकों के प्रति उनका प्रेम उन्हें एक सदाबहार लीजेंड बनाता है। हम सभी उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं। Read This: https://theswadeshscoop.com/priyanka-chahar-choudhary-biography/ https://theswadeshscoop.com/pranit-more-bigg-boss-19-net-worth-comedian-rj/

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आधुनिक विज्ञान का गूढ़ रहस्य और प्राचीन हिंदू दर्शन की ब्रह्मांडीय ध्वनि: डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और सनातन ज्ञान

परिचय: “कल्पना कीजिए… आप जिस ब्रह्मांड में रहते हैं, उसका 95% हिस्सा आपके लिए अदृश्य (Invisible) है! यह वह गूढ़ सत्य है जिसे आधुनिक विज्ञान आज स्वीकार कर रहा है। डार्क मैटर (Dark Matter) और डार्क एनर्जी (Dark Energy) – ये दो रहस्यमय शक्तियाँ हमारे कॉसमॉस की पूरी संरचना और विस्तार को नियंत्रित करती हैं, फिर भी हम इनके बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानते। वैज्ञानिकों के लिए ये ब्रह्मांड के सबसे बड़े अनसुलझे प्रश्न हैं, जो उन्हें हर रोज़ रात में सोने नहीं देते। लेकिन क्या यह रहस्य केवल आधुनिक खोजों का परिणाम है? क्या हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने, जिन्होंने गहन ध्यान और अंतर्दृष्टि के माध्यम से ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का प्रयास किया, इन अदृश्य शक्तियों के बारे में कुछ संकेत दिए थे? इस लेख में, हम डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की आधुनिक वैज्ञानिक समझ को हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर उपनिषदों, भागवत गीता और सांख्य दर्शन के गूढ़ दर्शन के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे। theswadeshscoop.com पर आपका स्वागत है, जहाँ हम ज्ञान के विभिन्न धाराओं को एक साथ लाते हैं।” डार्क मैटर और डार्क एनर्जी: आधुनिक विज्ञान का अनसुलझा कोड आइए सबसे पहले इन दोनों वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझते हैं। http://Vedic Cosmology on Dark Matter 1. डार्क मैटर (Dark Matter): अदृश्य गोंद हमारा ब्रह्मांड तारों, ग्रहों, आकाशगंगाओं और नीहारिकाओं (nebulae) जैसे दृश्यमान पदार्थ (Ordinary Matter) से बना है, जिसे हम अपनी आँखों से देख सकते हैं या उपकरणों से माप सकते हैं। लेकिन वैज्ञानिक गणनाएँ बताती हैं कि यह दृश्यमान पदार्थ ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान (Total Mass) का केवल 5% ही है। बाकी लगभग 27% हिस्सा ‘डार्क मैटर’ से बना है। 2. डार्क एनर्जी (Dark Energy): ब्रह्मांड का विस्तारक बल ब्रह्मांड के कुल पदार्थ-ऊर्जा (Mass-Energy) का लगभग 68% हिस्सा ‘डार्क एनर्जी’ है। यह डार्क मैटर से भी अधिक रहस्यमय है। ये दोनों अवधारणाएँ मिलकर ब्रह्मांड के 95% हिस्से का निर्माण करती हैं, जिसके बारे में हमारी वर्तमान वैज्ञानिक समझ बहुत सीमित है। यह हमारे अस्तित्व की सबसे मौलिक पहेली है। हिंदू दर्शन की ब्रह्मांडीय अंतर्दृष्टि: अनदेखी शक्तियों का ज्ञान अब हम हिंदू धर्मग्रंथों की ओर मुड़ते हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्राचीन ऋषि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं या दूरबीनों का उपयोग नहीं करते थे। उन्होंने गहन आत्मनिरीक्षण (Introspection), ध्यान (Meditation) और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि (Spiritual Insight) के माध्यम से ब्रह्मांड के गूढ़ सत्यों को समझने का प्रयास किया। उनके दर्शन में कुछ ऐसे सिद्धांत मिलते हैं जो डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की अवधारणाओं के साथ अद्भुत वैचारिक समानताएं रखते हैं। 1. अव्यक्त प्रकृति और पुरुष: डार्क मैटर की प्राचीन ध्वनि सांख्य दर्शन, जो हिंदू दर्शन के छह मुख्य स्कूलों में से एक है, ब्रह्मांड को पुरुष (Consciousness) और प्रकृति (Matter/Energy) के दो शाश्वत सिद्धांतों से समझाता है। यहां, डार्क मैटर की अवधारणा को अव्यक्त प्रकृति या पुरुष के साथ जोड़ा जा सकता है: 2. शक्ति और माया: डार्क एनर्जी का गतिशील स्वरूप हिंदू दर्शन में शक्ति ब्रह्मांड की दिव्य स्त्री ऊर्जा है, जो सृजन, गति, संरक्षण और विनाश की मूल शक्ति है। माया वह ब्रह्मांडीय शक्ति है जो भ्रम (Illusion) पैदा करती है और इस भौतिक दुनिया को प्रकट करती है। http://Lord Shiva and Dark Energy 3. उपनिषद और वेदों में अप्रकट की खोज उपनिषदों और वेदों में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसकी अंतर्निहित (inherent) प्रकृति पर गहरा चिंतन मिलता है। 4. अष्टधा प्रकृति (भागवत गीता): सूक्ष्म तत्व भागवत गीता में भगवान कृष्ण अपनी अष्टधा प्रकृति का वर्णन करते हैं, जिसमें आठ तत्व शामिल हैं: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश (स्थूल या प्रकट तत्व), मन, बुद्धि और अहंकार (सूक्ष्म या अप्रकट तत्व)। Ref: http://Dark Matter and Dark Energy in Hindu Scriptures निष्कर्ष: विज्ञान और अध्यात्म का संगम आधुनिक विज्ञान ने हमें ब्रह्मांड के भौतिक रहस्यों के बारे में अभूतपूर्व जानकारी दी है, लेकिन डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसी अवधारणाएँ हमें यह भी बताती हैं कि हम अभी भी ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से से अनभिज्ञ (ignorant) हैं। वहीं, हिंदू धर्मग्रंथ और दर्शन, हजारों साल पहले ही, ब्रह्मांड के एक ऐसे दृष्टिकोण को प्रस्तुत कर चुके हैं जहाँ अदृश्य, अप्रकट और गतिशील शक्तियाँ सृष्टि के मूल में हैं। वेदों का ‘अव्यक्त’, सांख्य की ‘प्रकृति’ और ‘पुरुष’, और शक्ति की गतिशील ऊर्जा, ये सभी आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान के उन 95% अनदेखे हिस्सों के साथ एक गहरा वैचारिक संवाद स्थापित करते हैं। यह संयोग नहीं हो सकता। यह शायद हमें बताता है कि विज्ञान और अध्यात्म, भले ही अलग-अलग रास्ते हों, अंततः एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं—एक ऐसा सत्य जहाँ अस्तित्व का अधिकांश भाग हमारी सीमित धारणाओं…

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ब्रह्मांड के 10 सबसे बड़े रहस्य: वह 95% दुनिया जिसे हम नहीं जानते

अदृश्य ब्रह्मांड का रहस्योद्घाटन “कल्पना कीजिए… आप जिस ब्रह्मांड में रहते हैं, उसका 95% हिस्सा आपके लिए अदृश्य (Invisible) है! हमारे कॉसमॉस (Cosmos) में कुछ ऐसे रहस्य छुपे हैं, जो वैज्ञानिकों को हर रोज़ रात में सोने नहीं देते।” एक संकेत जो 70 साल पहले आया, और उसने एलियन लाइफ (Alien Life) की उम्मीद जगा दी। एक तारा प्रणाली जहाँ शायद किसी एलियन सभ्यता (Alien Civilization) ने अपना पूरा घर बना लिया है। और एक विशाल ‘छेद’ (Giant Hole) जो हमारे ब्रह्मांड में होना ही नहीं चाहिए। नमस्कार दोस्तों, और वेलकम है आपके इस पसंदीदा चैनल पर। आज हम बात करेंगे अंतरिक्ष की 10 सबसे रहस्यमय खोजों की। ये वो गहरे राज़ हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खगोलविद (Astronomers) अपनी पूरी ज़िंदगी लगा रहे हैं। तैयार हो जाइए, क्योंकि आज आपका ब्रह्मांड को देखने का नज़रिया बदलने वाला है। आइए, इस काउंटडाउन को शुरू करते हैं! नंबर 10: Rogue Planets – आवारा ग्रह शुरुआत करते हैं नंबर 10 से: रोग प्लैनेट्स (Rogue Planets)। ये वो ग्रह हैं, जिनका अपना कोई तारा (Star) नहीं होता। ये गैलेक्सी (Galaxy) में अकेले, भटकते हुए घूमते हैं। कल्पना कीजिए, एक ऐसी दुनिया जहाँ हमेशा अंधेरा (Dark) रहता है, और ये किसी भी क्षण (Moment) में हमारे सौर मंडल (Solar System) में प्रवेश कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हमारी आकाशगंगा (Milky Way) में तारों की संख्या से भी ज़्यादा रोग प्लैनेट्स हो सकते हैं। लेकिन ये कहाँ से आते हैं? सबसे प्रबल थ्योरी यह है कि ये अपनी मूल तारा प्रणाली (Original Star System) से गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) की गड़बड़ी के कारण बाहर धकेल दिए गए हैं। ये आवारा ग्रह ब्रह्मांड में ऊर्जा के संतुलन और ग्रहों के निर्माण (formation) की हमारी समझ को चुनौती देते हैं। नंबर 9: मार्स का मीथेन रहस्य (Mars’ Methane Mystery) मंगल ग्रह (Mars) पर जीवन की खोज सबसे बड़ा मिशन है। रोवर्स (Rovers) ने मंगल पर मीथेन गैस (Methane Gas) का पता लगाया है, जो समय-समय पर बढ़ती और घटती रहती है। पृथ्वी पर, मीथेन अक्सर जीवित जीवों (Living Organisms) द्वारा उत्सर्जित (Produce) होती है—गाय, बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव (microbes)। क्या इसका मतलब है कि मंगल पर जीवन मौजूद है, या यह कोई असामान्य भूवैज्ञानिक प्रक्रिया (Unusual Geological Process) है, जैसे चट्टानों और पानी के बीच की प्रतिक्रिया? रहस्य अभी भी गहरा है। अगर यह जैविक (Biological) है, तो हम ब्रह्मांड में अकेले नहीं हैं। अगर यह भूवैज्ञानिक है, तो यह मंगल के आंतरिक भाग (Internal Structure) को समझने का एक नया रास्ता खोलता है। यह मीथेन का रहस्य ही है जो हमें मंगल पर वापस खींच रहा है। नंबर 8: द ग्रेट अट्रैक्टर (The Great Attractor) – महान आकर्षण हमारी पूरी लोकल ग्रुप ऑफ़ गैलेक्सीज़ (Local Group of Galaxies), जिसमें हमारी अपनी आकाशगंगा ‘मिल्की वे’ (Milky Way) भी शामिल है, एक सिंगल पॉइंट की तरफ़ 5 लाख मील प्रति घंटे की गति (Speed) से खींची जा रही है। इस खींचने वाली शक्ति को द ग्रेट अट्रैक्टर कहा जाता है। लेकिन यह क्या है? इसे हम सीधे देख नहीं सकते, क्योंकि यह हमारी आकाशगंगा के प्लेन (Plane) के पीछे कॉस्मिक डस्ट (Cosmic Dust) के घने बादलों में छुपा हुआ है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह गैलेक्सी के एक बहुत बड़े समूह (Supercluster) का केंद्र है, जहाँ इतनी अधिक डार्क मैटर (Dark Matter) और द्रव्यमान (Mass) केंद्रित है कि यह पूरे क्षेत्र को अपनी ओर खींच रहा है। हम सब एक अदृश्य वस्तु (Invisible Object) की ओर खींचे जा रहे हैं—यह ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमय यात्रा है। नंबर 7: ब्लैक होल सिंगुलैरिटीज़ (Black Hole Singularities) जब एक विशाल तारा (Giant Star) ढह जाता है, तो ब्लैक होल (Black Hole) बनता है। इसके केंद्र में होती है सिंगुलैरिटी (Singularity)। यह एक ऐसा पॉइंट है, जहाँ सभी द्रव्यमान एक शून्य आयतन (Zero Volume) में संकुचित (Compressed) हो जाते हैं। यह वह स्थान है, जहाँ समय (Time) और अंतरिक्ष (Space) अपनी पहचान खो देते हैं। यहाँ भौतिकी (Physics) के ज्ञात नियम (Known Laws) काम करना बंद कर देते हैं। सिंगुलैरिटी के अंदर क्या होता है? यह गुरुत्वाकर्षण (Gravity) और क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) के बीच का सबसे बड़ा टकराव है। क्या यह एक पुल है जो सफ़ेद छेद (White Hole) या किसी अन्य ब्रह्मांड की ओर जाता है? यह ब्रह्मांड का सबसे बड़ा अनसुलझा प्रश्न है, जो अल्बर्ट आइंस्टीन के सिद्धांतों को चुनौती देता है। नंबर 6: फ़ास्ट रेडियो बर्स्ट्स – FRBs (तेज़ रेडियो विस्फोट) ये गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) से आने वाले अत्यधिक शक्तिशाली रेडियो संकेत (Powerful…

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3I/ATLAS: हमारे सौरमंडल का सबसे रहस्यमय ‘अंतरिक्ष यात्री’

परिचय: क्या है 3I/ATLAS और क्यों है यह इतना खास? 3I/ATLAS (3I/एटलस) एक साधारण धूमकेतु नहीं है। यह एक अंतरतारकीय पिंड (Interstellar Object – ISO) है, जिसका अर्थ है कि यह हमारे सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर, किसी दूसरे तारे के सौरमंडल से आया है। जुलाई 2025 में इसकी खोज के बाद से, इस रहस्यमय मेहमान ने वैज्ञानिकों और आम जनता दोनों के बीच जबरदस्त जिज्ञासा पैदा की है। इसे आधिकारिक तौर पर C/2025 L2 (ATLAS) या संक्षेप में 3I/ATLAS नाम दिया गया है। नाम में ‘I’ Interstellar (अंतरतारकीय) को दर्शाता है, और ‘3’ इंगित करता है कि यह मानव इतिहास में खोजा गया तीसरा ऐसा अंतरतारकीय पिंड है (पहले दो थे ‘ओउमुआमुआ’ और ‘बोरिसोव’)। ‘ATLAS’ उस टेलीस्कोप प्रणाली का नाम है जिसने इसे पहली बार देखा था। 3I/ATLAS विशेष है क्योंकि यह हमें ब्रह्मांड के सुदूर कोनों से सामग्री का नमूना प्रदान करता है, जिससे हमें यह समझने का मौका मिलता है कि अन्य तारों के आसपास ग्रह और धूमकेतु कैसे बनते हैं। 3I/ATLAS क्या है? एक धूमकेतु या कुछ और? वैज्ञानिकों ने 3I/ATLAS को एक धूमकेतु के रूप में वर्गीकृत किया है क्योंकि सूर्य के पास आने पर इसने विशिष्ट धूमकेतु जैसी गतिविधि दिखाई – यानी, इसकी बर्फीली सतह से गैस और धूल निकलना (जिसे कोमा या पूँछ कहा जाता है)। विशेषता विवरण महत्व नामकरण 3I/ATLAS ‘I’ इंटरस्टेलर (Interstellar) और ‘3’ तीसरा खोजा गया पिंड। प्रकृति अंतरतारकीय धूमकेतु (Interstellar Comet) यह हमारे सूर्य के बजाय किसी अन्य तारे के चारों ओर बना है। कक्षा (Orbit) हाइपरबोलिक (Hyperbolic Trajectory) यह सूर्य से गुरुत्वाकर्षण द्वारा बंधा नहीं है, यह एक बार हमारे सौरमंडल से गुजरेगा और फिर हमेशा के लिए बाहर निकल जाएगा। गति लगभग 57 किमी/सेकंड यह गति इतनी अधिक है कि यह पुष्टि करती है कि यह हमारे सौरमंडल से उत्पन्न नहीं हुआ है। आकार (अनुमानित) लगभग 440 मीटर से 5.6 किलोमीटर व्यास (Manhattan-sized) यह इसे पिछले अंतरतारकीय पिंडों की तुलना में बड़ा बनाता है। यह एक “अंतरतारकीय आगंतुक” है जो अरबों वर्षों तक तारों के बीच यात्रा करने के बाद हमारे सौरमंडल से गुजर रहा है।https://science.nasa.gov/solar-system/comets/3i-atlas/ उत्पत्ति: 3I/ATLAS आया कहाँ से? 3I/ATLAS की उत्पत्ति खगोल विज्ञानियों के लिए सबसे रोमांचक विषय है। इसकी कक्षा के गहन विश्लेषण से इसकी अंतरतारकीय यात्रा की पुष्टि होती है: 1. अपरिचित यात्रा-पथ (Trajectory): धूमकेतु 3I/ATLAS एक हाइपरबोलिक कक्षा पर यात्रा कर रहा है। इसका अर्थ है कि इसकी गति इतनी अधिक है कि यह हमारे सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल जाएगा और कभी वापस नहीं आएगा। 2. गैलेक्सी के ‘थिक डिस्क’ का रहस्य: यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के डॉ. मैथ्यू हॉपकिंस (Dr. Matthew Hopkins) जैसे खगोलविदों ने उल्लेख किया है कि इस पिंड का ‘थिक डिस्क’ से जुड़ा होना महत्वपूर्ण है। डॉ. मैथ्यू हॉपकिंस (Dr. Matthew Hopkins) के अनुसार: “हमारे सौरमंडल के सभी धूमकेतु लगभग 4.5 अरब साल पहले बने थे, लेकिन 3I/ATLAS जैसे अंतरतारकीय धूमकेतु उससे बहुत पहले बने होंगे, संभवतः यह अब तक का सबसे पुराना देखा गया धूमकेतु हो सकता है।” यह हमें अन्य आकाशगंगा प्रणालियों के गठन और विकास की जानकारी देता है, जहाँ रासायनिक और भौतिक स्थितियाँ हमारे अपने सौरमंडल से बहुत अलग रही होंगी। 3I/ATLAS की रासायनिक संरचना (Composition): क्या है इसके अंदर? अंतरिक्ष से आया यह यात्री अपने साथ कुछ असामान्य रासायनिक हस्ताक्षर लेकर आया है, जिसने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है: 1. जल और कार्बन डाइऑक्साइड (Water and CO_2) : जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) और अन्य उपकरणों के अवलोकन से पता चला है कि 3I/ATLAS सक्रिय रूप से गैसों का उत्सर्जन कर रहा है। 2. असामान्य धातु सामग्री (Unusual Metal Content): सबसे आश्चर्यजनक खोजों में से एक अत्यंत ठंडी दूरी पर निकेल वाष्प (Atomic Nickel Vapor) की उपस्थिति थी। इन असामान्यताओं ने कुछ वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इसकी उत्पत्ति और इतिहास हमारे सौरमंडल के ज्ञात धूमकेतुओं से काफी भिन्न है। वैज्ञानिक और NASA के बयान: एलियन या प्रकृति का करिश्मा 3I/ATLAS ने वैज्ञानिक समुदाय को दो प्रमुख समूहों में विभाजित कर दिया है: एक जो इसे प्राकृतिक धूमकेतु मानते हैं और दूसरा जो इसकी अजीबोगरीब विशेषताओं के कारण इसे बाह्य-ग्रह तकनीक मानने की संभावना तलाशते हैं। 1. नासा का आधिकारिक दृष्टिकोण (NASA’s Official Stance): नासा और उसके समर्थित अवलोकन प्रणाली ATLAS ने इस बात की पुष्टि की है कि 3I/ATLAS एक प्राकृतिक धूमकेतु है और इससे पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। NASA का बयान (सारांशित): “धूमकेतु 3I/ATLAS हमारे सौरमंडल से परे का एक दुर्लभ और आकर्षक आगंतुक है, जो वैज्ञानिकों को अन्य तारा प्रणालियों की सामग्री…

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टीवी की नई ‘नागिन’ प्रियंका चाहर चौधरी: ‘उड़ारियां’ से ‘बिग बॉस’ तक, जीवनी, नेट वर्थ और ‘नागिन 7’ का पूरा सच

परिचय: ग्लैमर वर्ल्ड की नई सनसनी भारतीय टेलीविजन की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो रातोंरात स्टारडम हासिल कर लेते हैं, लेकिन प्रियंका चाहर चौधरी (Priyanka Chahar Choudhary) की कहानी संघर्ष, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत की मिसाल है। जयपुर की साधारण पृष्ठभूमि से आकर मुंबई के ग्लैमर वर्ल्ड में अपनी जगह बनाना और फिर ‘बिग बॉस’ जैसे मंच पर अपनी बेबाकी से लाखों दिलों पर राज करना, यह सफर किसी परी कथा से कम नहीं है। ‘उड़ारियां’ की ‘तेजो’ से लेकर ‘बिग बॉस 16’ की सबसे दमदार कंटेस्टेंट बनने तक, प्रियंका ने हर कदम पर खुद को साबित किया है। और अब, वह एकता कपूर के सबसे बड़े फैंटेसी शो, ‘नागिन 7’ की नई रानी बनकर टेलीविज़न के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रही हैं। यह लेख प्रियंका चाहर चौधरी के जीवन, करियर, उनकी नेट वर्थ, प्रमुख विवादों और उनके बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट्स पर एक विस्तृत और तथ्यात्मक नज़र डालता है। प्रारंभिक जीवन और परिवार (Early Life and Family) परी चौधरी से प्रियंका चाहर चौधरी बनने का सफर प्रियंका चाहर चौधरी का जन्म 13 अगस्त 1996 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुआ था। उनका असली नाम ‘परी चौधरी’ था। प्रियंका का परिवार आर्मी पृष्ठभूमि से आता है; उनके पिता आर्मी ऑफिसर रह चुके हैं, और उनकी दो बहनें भी सेना में कार्यरत हैं। एक अनुशासित और मध्यमवर्गीय परिवार से होने के बावजूद, प्रियंका ने ग्लैमर और अभिनय की दुनिया को चुना। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जयपुर से पूरी की और इसके बाद मुंबई और दिल्ली में भी शिक्षा ग्रहण की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की। अभिनय की दुनिया में आने से पहले, उन्होंने मॉडलिंग और कुछ स्थानीय इवेंट्स होस्टिंग का काम भी किया। एक्टिंग करियर शुरू करने के बाद, उन्होंने न्यूमेरोलॉजी के कारण अपना नाम ‘परी चौधरी’ से बदलकर ‘प्रियंका चाहर चौधरी’ रख लिया। यह नाम परिवर्तन उनके जीवन में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसके बाद उनके करियर को नई ऊंचाइयां मिलीं। प्रियंका अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाती हैं और उनका पूरा खर्च वहन करती हैं, जो उनके मजबूत पारिवारिक मूल्यों को दर्शाता है। संघर्ष और करियर की शुरुआत प्रियंका ने बहुत कम उम्र, लगभग 16 साल की उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। उनका पहला प्रोजेक्ट एक म्यूजिक वीडियो था, जहाँ उन्होंने अपने डांस मूव्स दिखाए। शुरुआत में, उन्होंने कई छोटे म्यूजिक वीडियोज में काम किया, जिनमें ज़्यादातर पंजाबी गाने थे। प्रमुख म्यूजिक वीडियोज: म्यूजिक वीडियोज के बाद, प्रियंका ने बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा। उन्होंने ‘द गर्ल विद इंडियन एमराल्ड’ (2013) जैसी फिल्मों में छोटे कैमियो किए। टेलीविजन में प्रवेश (TV Debut) प्रियंका को टेलीविजन पर पहला बड़ा मौका साल 2019 में मिला, जब उन्होंने कलर्स टीवी के शो ‘गठबंधन’ में सेजल का किरदार निभाया। इसके बाद, वह ‘ये हैं चाहतें’ (2020) और ‘सावधान इंडिया’ जैसे शो में भी नजर आईं, जहाँ उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता को निखारा। द बिग ब्रेक: ‘उड़ारियां’ और तेजो का उदय प्रियंका चाहर चौधरी के करियर का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ आया 2021 में, जब उन्हें सरगुन मेहता और रवि दुबे के प्रोडक्शन हाउस के शो ‘उड़ारियां’ (Udaariyaan) में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला। इस शो में उन्होंने ‘तेजो संधू’ का किरदार निभाया, जो पंजाब की एक मजबूत, शिक्षित और भावुक लड़की थी। तेजो के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। दर्शक उनकी सादगी, भावनाओं और शो में अंकित गुप्ता (फतेह) के साथ उनकी केमिस्ट्री, जिसे फैंस ने ‘प्रियांकित’ नाम दिया, के दीवाने हो गए। यह शो लगातार तीन सालों तक टीआरपी चार्ट पर छाया रहा और प्रियंका को टेलीविजन की टॉप अभिनेत्रियों की सूची में शामिल कर दिया। यह किरदार न केवल उनके करियर को गति दी, बल्कि उन्हें ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े मंच तक पहुंचने का रास्ता भी दिखाया। रियलिटी स्टारडम: ‘बिग बॉस 16’ का तूफानी सफर साल 2022-2023 में, प्रियंका चाहर चौधरी ने कंट्रोवर्शियल रियलिटी शो ‘बिग बॉस 16’ में हिस्सा लिया। इस शो ने उनकी स्टारडम को एक नई ऊँचाई दी। शो के दौरान, उन्हें ‘हक से मंडली तोड़ना’ (मंडली को तोड़ने की कोशिश करना) और अपनी बेबाक राय रखने के लिए जाना गया। प्रियंका को शो की ‘वॉयस ऑफ रीज़न’ (तर्क की आवाज़) माना गया। उनका गेम हमेशा स्पष्ट रहा, जिसने उन्हें दर्शकों का भरपूर समर्थन दिलाया। ‘बिग बॉस 16’ की हाइलाइट्स: नेट वर्थ, आय स्रोत और लक्जरी लाइफस्टाइल (Net Worth and Income) प्रियंका चाहर चौधरी आज टेलीविजन इंडस्ट्री की सबसे महंगी और सफल अभिनेत्रियों…

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लाख रुपये से कम की टॉप 5 कारें: कम बजट में बेहतरीन मोबिलिटी (विस्तृत विश्लेषण)

भारत का कार बाजार दुनिया में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी बाजारों में से एक है, और इसकी रीढ़(टॉप 5 कारें) ₹5 लाख से कम (एक्स-शोरूम) से कम कीमत वाली कारों का सेगमेंट है। यह वह सेगमेंट है जो पहली बार कार खरीदने वालों, छोटे परिवारों और उन शहरी यात्रियों के लिए जीवन रेखा है जिनकी प्राथमिकता कम कीमत, शानदार माइलेज और कम रखरखाव लागत होती है। यह बजट सीमा मुख्य रूप से एंट्री-लेवल हैचबैक के बेस (Base) और मिड (Mid) वेरिएंट तक सीमित है। हालांकि, आधुनिक कारों में अब डुअल एयरबैग और ABS जैसी अनिवार्य सुरक्षा सुविधाएं भी मिलती हैं, जिससे ग्राहकों को अपनी कार में बुनियादी सुरक्षा भी मिल पाती है। यहां हम उन टॉप 5 कारों का गहन विश्लेषण कर रहे हैं, जिनके लोकप्रिय वेरिएंट इस महत्वपूर्ण बजट के भीतर आते हैं, जिसमें उनकी कीमत, स्पेसिफिकेशन, माइलेज और सुरक्षा रेटिंग का विस्तृत विवरण दिया गया है। 1. मारुति सुजुकी ऑल्टो K10 (माइलेज का बादशाह) मारुति सुजुकी ऑल्टो K10 ने अपने पूर्ववर्ती Alto 800 की विरासत को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। यह कार बेहतर परफॉर्मेंस वाले इंजन और मारुति के विशाल सर्विस नेटवर्क के कारण भारत में सबसे लोकप्रिय एंट्री-लेवल कार बनी हुई है टॉप 5 कारें। कीमत और वेरिएंट (₹5 लाख से कम) ⚙️ विस्तृत स्पेसिफिकेशन Alto K10, Maruti के नए और बेहद कुशल K10C इंजन द्वारा संचालित है, जो बेहतर दक्षता के लिए ‘आइडल स्टार्ट/स्टॉप’ तकनीक के साथ आता है। विशेषता विवरण इंजन 998cc, 3-सिलेंडर, K10C पेट्रोल पावर/टॉर्क 66 bhp / 89 Nm ट्रांसमिशन 5-स्पीड मैनुअल/ 5-स्पीड AMT (ऑटोमैटिक) टैंक क्षमता 27 लीटर बूट स्पेस 214 लीटर ग्राउंड क्लीयरेंस 160 mm माइलेज और रनिंग कॉस्ट Alto K10 इस सेगमेंट में माइलेज का पर्याय है। सुरक्षा और फीचर्स निर्णय: Alto K10 ईंधन दक्षता और कम रखरखाव चाहने वाले खरीदारों के लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। VXi AMT वेरिएंट ₹5 लाख के भीतर ऑटोमैटिक ड्राइविंग की सुविधा भी देता है। 2. मारुति सुजुकी एस-प्रेसो (सबसे किफायती माइक्रो-एसयूवी) S-Presso को मारुति ने एक “माइक्रो-एसयूवी” के रूप में पेश किया है। इसकी ऊंची सवारी (हाई सीटिंग) और बॉक्सनुमा डिज़ाइन उन लोगों को आकर्षित करता है जो कम बजट (5 लाख से कम) में भी एसयूवी जैसा लुक और बेहतर रोड विजिबिलिटी चाहते हैं। कीमत और वेरिएंट (₹5 लाख से कम) विस्तृत स्पेसिफिकेशन Alto K10 की तरह, S-Presso भी उसी K10C इंजन का उपयोग करती है, जो इसकी दक्षता सुनिश्चित करता है। विशेषता विवरण इंजन 998cc, 3-सिलेंडर, K10C पेट्रोल पावर/टॉर्क 66 bhp / 89 Nm ट्रांसमिशन 5-स्पीड मैनुअल टैंक क्षमता 27 लीटर बूट स्पेस 240 लीटर ग्राउंड क्लीयरेंस 180 mm (इस सूची में सबसे अधिक) माइलेज और रनिंग कॉस्ट इसका हल्का वजन और कुशल इंजन इसे एक और माइलेज किंग बनाता है। सुरक्षा और फीचर्स निर्णय: S-Presso इस सूची में सबसे सस्ती कार 5 लाख से कम है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनका बजट बहुत सीमित है और जिन्हें ऊँची सीटिंग पोजीशन और खराब सड़कों के लिए उच्च ग्राउंड क्लीयरेंस चाहिए। हालांकि, कम सुरक्षा रेटिंग एक बड़ी कमी है। 3. टाटा टियागो XE (सुरक्षा में बेजोड़) टाटा टियागो ने ₹5 लाख से कम की कीमत वाली कारों के सेगमेंट में सुरक्षा के मामले में एक नया मानक स्थापित किया है। टियागो ही इस कीमत सीमा में 4-स्टार सुरक्षा रेटिंग वाली एकमात्र कार है, जो इसे सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले परिवारों के लिए पहला और सबसे स्पष्ट विकल्प बनाती है। कीमत और वेरिएंट (₹5 लाख से कम) विस्तृत स्पेसिफिकेशन टियागो का इंजन अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में थोड़ा अधिक शक्तिशाली है। विशेषता विवरण इंजन 1199cc, 3-सिलेंडर, रेवोट्रॉन पेट्रोल पावर/टॉर्क 86 bhp / 113 Nm ट्रांसमिशन 5-स्पीड मैनुअल टैंक क्षमता 35 लीटर बूट स्पेस 242 लीटर ग्राउंड क्लीयरेंस 170 mm माइलेज और रनिंग कॉस्ट बेहतर सुरक्षा और बड़े इंजन के कारण इसका माइलेज मारुति प्रतिद्वंद्वियों से थोड़ा कम है। सुरक्षा और फीचर्स यही टियागो का सबसे बड़ा विक्रय बिंदु है। निर्णय: टाटा टियागो XE इस सेगमेंट में सबसे सुरक्षित कार है, जो सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते, उनके लिए यह सर्वोत्तम विकल्प है। फीचर्स की कमी को अनदेखा किया जा सकता है यदि सुरक्षा आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 4. रेनॉल्ट क्विड (स्टाइल और बूट स्पेस का संयोजन) रेनॉल्ट क्विड ने अपने SUV जैसे स्टाइल और फीचर्स के कारण एंट्री-लेवल सेगमेंट में हलचल मचा दी थी। यह सड़क पर अपनी आकर्षक उपस्थिति और बड़े बूट स्पेस के कारण जाना जाता है। कीमत और वेरिएंट (₹5 लाख से कम) विस्तृत स्पेसिफिकेशन क्विड का 1.0 लीटर इंजन एक अच्छा प्रदर्शन और दक्षता का संतुलन…

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एक अरब सपनों की पूर्ति: भारत की महिलाओं ने जीता पहला क्रिकेट विश्व कप ख़िताब

Keywords: भारत महिला क्रिकेट विश्व कप, हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा, स्मृति मंधाना, पहला विश्व कप खिताब, भारतीय महिला क्रिकेट, विश्व कप 2025 फाइनल, क्रिकेट रिकॉर्ड 2 नवंबर 2025 की रात महज एक खेल आयोजन से कहीं अधिक थी; यह भारतीय समाज के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ था। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में, घरेलू दर्शकों के सामने, भारत की महिला क्रिकेट टीम—’विमेन इन ब्लू’—ने अपना पहला आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर की जुझारू टीम ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर दो दशकों की निराशा को हमेशा के लिए एक अविस्मरणीय जीत में बदल दिया। इस जीत की तुलना 1983 के पुरुष विश्व कप की विजय से की जा रही है, जो देश में महिला क्रिकेट के लिए एक विशाल छलांग साबित होगी। यह सिर्फ ट्रॉफी उठाना नहीं था; यह एक अरब आकांक्षाओं की पूर्ति थी, जिसने वैश्विक खेल के शिखर पर भारतीय महिला क्रिकेट के स्थायी आगमन को चिह्नित किया। ग्रैंड फिनाले: एक संक्षिप्त स्कोरकार्ड फाइनल में दो ऐसी टीमें आमने-सामने थीं जो अपना पहला विश्व कप खिताब जीतने के लिए बेताब थीं, जो टूर्नामेंट के इतिहास में दुर्लभ था। भारत ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए आखिरकार जीत की रेखा पार कर ली। टीम पारी का स्कोर ओवर सर्वोच्च स्कोरर प्रमुख गेंदबाज भारत महिला 298/7 50.0 शेफाली वर्मा (87) आयाबोंगा खाका (3/58) दक्षिण अफ्रीका महिला 246 ऑल आउट 45.4 लौरा वोल्वार्ड्ट (101) दीप्ति शर्मा (5/39) परिणाम भारत महिला 52 रनों से जीती प्लेयर ऑफ द मैच: दीप्ति शर्मा $298/7$ का स्कोर सलामी जोड़ी की शतकीय साझेदारी और महत्वपूर्ण लेट-इनिंग्स ब्लिट्ज़ की नींव पर बना था, जो प्रोटियाज के लिए एक दुर्गम लक्ष्य साबित हुआ। हालांकि दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट ने एक शानदार शतक लगाया, लेकिन दीप्ति शर्मा के ऐतिहासिक पाँच विकेट हॉल ने जीत पर मुहर लगा दी। दीप्ति शर्मा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब भी मिला। सिनेमाई सफ़र: खिताब तक का सफ़र भारत का अभियान जुझारूपन का एक नाटकीय आख्यान था, जो इस बात का एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि एक टीम सबसे महत्वपूर्ण समय पर कैसे शिखर पर पहुँचती है। ग्रुप चरण के माध्यम से यह यात्रा शुरुआती आत्मविश्वास, मध्य-टूर्नामेंट में एक गंभीर गिरावट, और एक चमत्कारी, उच्च दबाव वाली वापसी से चिह्नित थी। शुरुआती गति और बीच की निराशा भारत ने श्रीलंका (59 रन से जीत, DLS) और चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर 88 रनों की शानदार जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत आत्मविश्वास से की। दीप्ति शर्मा और युवा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ जैसे प्रमुख खिलाड़ियों ने मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। हालांकि, टीम तीन लगातार हार के साथ मुश्किल में आ गई: इन हार ने भारत की विश्व कप उम्मीदों को दांव पर लगा दिया, जिसमें सेमीफाइनल बर्थ सुरक्षित करने के लिए दो दुर्जेय विरोधियों के खिलाफ लगातार जीत की आवश्यकता थी। शानदार वापसी और सेमीफाइनल में उछाल ‘विमेन इन ब्लू’ ने शानदार प्रदर्शन के साथ दबाव का जवाब दिया: प्रमुख खिलाड़ी: जीत के वास्तुकार हालांकि जीत एक सामूहिक प्रयास था, कुछ खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिन्होंने टूर्नामेंट की गति को बदल दिया और इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। https://www.livemint.com/sports/cricket-news/india-w-vs-south-africa-w-final-live-score-icc-womens-world-cup-ind-w-vs-sa-w-women-national-cricket-team-2-november-11762062983698.html स्मृति मंधाना: रन मशीन स्टाइलिश बाएं हाथ की बल्लेबाज भारत के लिए सबसे निरंतर बल्लेबाज थीं, जिन्होंने $54.25$ की औसत से 434 रन बनाकर टूर्नामेंट में दूसरी सबसे अधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी के रूप में अपनी जगह बनाई। न्यूजीलैंड के खिलाफ उनके मैच जिताऊ शतक सहित उनकी लगातार शुरुआत ने भारत को बड़े स्कोर का मंच दिया। फाइनल में उनके 45 रन ने एक ठोस नींव सुनिश्चित की, और उन्होंने एक ही महिला वनडे विश्व कप संस्करण में किसी भारतीय महिला द्वारा बनाए गए सबसे अधिक रनों के लिए मिताली राज के रिकॉर्ड को तोड़ा। दीप्ति शर्मा: ऑल-राउंडर दीवार दीप्ति शर्मा का ऑल-राउंड योगदान अमूल्य था। उन्होंने महत्वपूर्ण अर्धशतक बनाए, मध्य क्रम को स्थिर किया, और लगातार गेंद से शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल में उनका प्रदर्शन बस पौराणिक था: हरमनप्रीत कौर: जुझारूपन की कप्तान कप्तान के रूप में, कौर ने अपार भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सामरिक कौशल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मध्य-टूर्नामेंट की मंदी के दौरान टीम को एकजुट रखा और टीम के विश्वास के बारे में खुलकर बात की। फाइनल में उनकी आक्रामक कप्तानी और 20 रनों का महत्वपूर्ण कैमियो उनके नेतृत्व का उदाहरण था। वह 1983 में कपिल देव के बाद 50 ओवर का विश्व कप ट्रॉफी उठाने वाली केवल दूसरी भारतीय कप्तान बनीं। जेमिमा रोड्रिग्स: सेमीफाइनल की हीरो…

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कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली: देवताओं का पर्व, धर्म और आस्था का संगम

प्रस्तावना: कार्तिक मास की महिमा कार्तिक मास हिंदू पंचांग का आठवां महीना है, जिसे सभी महीनों में सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में किया गया स्नान, दान और तपस्या अनंत पुण्य फल प्रदान करती है। इस मास के अंतिम दिन आने वाली पूर्णिमा तिथि का महत्व तो स्वयं शास्त्रों ने भी गाया है। इसे ‘कार्तिक पूर्णिमा’ या ‘त्रिपुरारी पूर्णिमा’ के नाम से जाना जाता है और दिवाली के ठीक पंद्रह दिन बाद मनाए जाने के कारण यह पर्व ‘देव दीपावली’ के नाम से भी विख्यात है। यह पर्व देवताओं के पृथ्वी पर उतरने और अपनी दिवाली मनाने का प्रतीक है, जो विशेष रूप से काशी (वाराणसी) के घाटों पर अपनी अलौकिक छटा बिखेरता है। कार्तिक पूर्णिमा / देव दीपावली 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की तिथि और मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2025 में, कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली की तारीख और शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है: विवरण तिथि / समय कार्तिक पूर्णिमा की तारीख बुधवार, 5 नवंबर 2025 पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 4 नवंबर 2025, रात्रि 10 बजकर 36 मिनट से पूर्णिमा तिथि का समापन 5 नवंबर 2025, शाम 06 बजकर 48 मिनट तक देव दीपावली दीपदान मुहूर्त शाम 05 बजकर 15 मिनट से शाम 07 बजकर 50 मिनट तक (प्रदोष काल) नोट: उदया तिथि के अनुसार, यह पर्व 5 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा, और दीपदान हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद और रात्रि होने से पहले) में करना शुभ माना जाता है। https://www.drikpanchang.com/diwali/dev-diwali/dev-deepawali-date-time.html?lang=hi कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कार्तिक पूर्णिमा एक ऐसा दिन है जब शैव और वैष्णव, दोनों ही संप्रदायों के प्रमुख देवता पूजे जाते हैं। इस दिन स्नान, दान, दीपदान और भगवान के भजन-पूजन का विशेष महत्व है। 1. गंगा स्नान और दान का महात्म्य शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना, गोदावरी या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने को ‘कार्तिक स्नान’ कहा जाता है, जो अश्वमेध यज्ञ के समान फल देता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण, इसे ‘महाकार्तिकी’ पूर्णिमा भी कहा जाता है। 2. गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) सिख समुदाय के लिए भी यह दिन अत्यंत पवित्र है, क्योंकि इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। इसलिए, सिख धर्मावलंबी इस दिन को ‘प्रकाश पर्व’ के रूप में मनाते हैं और गुरुद्वारों में विशेष अरदास और लंगर का आयोजन करते हैं। 3. तुलसी पूजा का समापन कार्तिक मास की एकादशी (देवउठनी एकादशी) को भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और इसी दिन तुलसी-शालिग्राम विवाह होता है। पूर्णिमा के दिन तक तुलसी जी की पूजा का विधान चलता है, और इस दिन दीपदान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी पौराणिक कथाएं और शास्त्र संदर्भ इस पूर्णिमा के महत्व को बढ़ाने वाली तीन प्रमुख पौराणिक कथाएं हैं: https://hindi.webdunia.com/other-festivals/kartik-poornima-katha-118112300033_1.html I. त्रिपुरासुर वध की कथा (त्रिपुरारी पूर्णिमा) II. मत्स्य अवतार की कथा III. सत्यनारायण व्रत कथा और चंद्रमा की कथा इस दिन कई स्थानों पर भगवान सत्यनारायण (भगवान विष्णु का ही एक रूप) की कथा भी सुनी जाती है, जो सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। इसी दिन चंद्रमा भी अपनी सोलह कलाओं से युक्त होकर पूर्ण रूप से पृथ्वी को प्रकाशमान करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा (त्रिपुरासुर कथा) कार्तिक पूर्णिमा की व्रत कथा मुख्य रूप से त्रिपुरासुर के वध से जुड़ी है। व्रत रखने वाले भक्त कथा श्रवण के माध्यम से इस दिन के महत्व को समझते हैं: व्रत कथा का सार: पौराणिक काल में त्रिपुरासुर नाम का एक महाभयंकर असुर था, जिसके तीन पुत्रों ने ब्रह्माजी से अविनाशी होने का वरदान पा लिया था। इस वरदान के बल पर वे देवताओं और मनुष्यों को बहुत कष्ट देने लगे। त्रिपुरासुर के पुत्रों ने पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल, तीनों लोकों पर अपना आतंक फैला दिया। देवताओं के राजा इंद्र समेत सभी देवता उनसे भयभीत होकर त्राहि-त्राहि करने लगे। अंततः, सभी देवतागण सहायता के लिए भगवान शिव के पास पहुँचे और त्रिपुरासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने देवताओं की करुण पुकार सुनी और त्रिपुरासुर तथा उसके पुत्रों का अंत करने का संकल्प लिया। उन्होंने एक अद्भुत और शक्तिशाली रथ का निर्माण किया। जिस दिन तीनों असुरों के नगर (त्रिपुर) एक सीधी रेखा में आए, उस दिन भगवान शिव…

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देव उठानी एकादशी: श्री विष्णु-तुलसी विवाह की दिव्य कथा और महत्व

दिनांक: 01 नवंबर, 2025 (शनिवार) कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देव उठानी एकादशी या देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ तिथि है। यह वह पावन दिन है जब जगत के पालनहार भगवान विष्णु अपनी चार मास की योगनिद्रा (चातुर्मास) से जागृत होते हैं और इसी के साथ सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाता है। इस एकादशी का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है – तुलसी विवाह, जिसमें भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप का विवाह माता तुलसी से कराया जाता है। यह पर्व आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से अति विशिष्ट है। https://vadicjagat.co.in/%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95-49/ देव उठानी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, इस वर्ष देव उठानी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। विवरण तिथि और समय एकादशी तिथि का प्रारंभ 1 नवंबर 2025, सुबह 09 बजकर 12 मिनट से एकादशी तिथि का समापन 2 नवंबर 2025, सुबह 07 बजकर 32 मिनट तक देव उठानी एकादशी व्रत 1 नवंबर 2025 (शनिवार) तुलसी विवाह (द्वादशी तिथि) 2 नवंबर 2025 (रविवार) मान्यतानुसार, जब भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं, तभी से सृष्टि में सकारात्मकता और शुभता का संचार होता है। इसलिए इस दिन को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, जिसमें बिना पंचांग देखे भी विवाह जैसे शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। भगवान विष्णु-तुलसी विवाह की पौराणिक कथा देव उठानी एकादशी के पावन अवसर पर होने वाले तुलसी विवाह के पीछे एक अत्यंत मार्मिक और महत्वपूर्ण पौराणिक कथा है, जिसका वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण और शिव महापुराण में मिलता है। कथा का सार और संदर्भ: प्राचीन काल में, वृंदा नामक एक परम सुंदरी, पवित्र और पतिव्रता स्त्री थी। उसका विवाह जालंधर नामक अत्यंत बलशाली और क्रूर असुर से हुआ था, जो सागर से उत्पन्न हुआ था। वृंदा के प्रबल सतीत्व के कारण, जालंधर को कोई भी देव या दैत्य पराजित नहीं कर सकता था। उसके अत्याचार से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए और जालंधर के विनाश का उपाय पूछा। देवताओं की प्रार्थना सुनकर, भगवान विष्णु ने जालंधर के पतिव्रत धर्म को भंग करने का निर्णय लिया। भगवान विष्णु ने छल से जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा के महल में प्रवेश किया। वृंदा ने उन्हें अपना पति समझकर उनका स्पर्श किया, जिससे उनका सतीत्व खंडित हो गया। इसी क्षण युद्ध भूमि में भगवान शिव ने जालंधर का वध कर दिया, क्योंकि अब उसकी शक्ति समाप्त हो चुकी थी। जब वृंदा को यह सत्य ज्ञात हुआ कि उसके साथ छल किया गया है और यह उनके पति नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु थे, तो वह अत्यंत क्रोधित हुई। अपने सतीत्व के भंग होने और पति की मृत्यु से दुखी वृंदा ने भगवान विष्णु को ‘पत्थर’ (शालिग्राम) बन जाने का शाप दे दिया। वृंदा के शाप के प्रभाव से भगवान विष्णु तुरंत पत्थर बन गए। यह देखकर सभी देवताओं में हाहाकार मच गया। माता लक्ष्मी सहित सभी देवताओं ने वृंदा से प्रार्थना की कि वह अपना शाप वापस ले लें। वृंदा ने पश्चाताप करते हुए भगवान विष्णु को शाप से मुक्त तो कर दिया, लेकिन स्वयं को पति की चिता में भस्म कर लिया और सती हो गईं। भगवान विष्णु का वरदान: जिस स्थान पर वृंदा भस्म हुईं, वहाँ एक पवित्र पौधा उत्पन्न हुआ, जिसे देवताओं ने ‘तुलसी’ नाम दिया। तब भगवान विष्णु ने वृंदा से कहा, “हे वृंदा! तुमने अपने सतीत्व के बल पर मुझे लक्ष्मी से भी अधिक प्रिय कर लिया है। अब तुम तुलसी के रूप में सदा मेरे साथ रहोगी। बिना तुलसी दल के मेरा कोई भी भोग पूर्ण नहीं होगा। तुम्हारा विवाह मेरे शालीग्राम स्वरूप से होगा और जो भी भक्त कार्तिक मास की एकादशी पर तुम्हारा विवाह शालीग्राम से कराएगा, वह समस्त सुखों को प्राप्त करेगा।” तभी से कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह माता तुलसी से कराने की परंपरा चली आ रही है। देव उठानी एकादशी का दार्शनिक संदेश (Philosophical Message) यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि जीवन के गहरे दार्शनिक सत्यों का प्रतीक है: देव उठानी एकादशी कैसे मनाएं और क्या करें? इस दिन विशेष रूप से व्रत, पूजा और तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। 1. व्रत और संकल्प 2. भगवान विष्णु का उत्थापन (जगाने का अनुष्ठान) 3. तुलसी विवाह का अनुष्ठान (द्वादशी को) इस दिन क्या करें और क्या न करें? (Rituals and Guidelines) क्या करें (Do’s) क्या न करें (Don’ts) तुलसी की पूजा: सुबह-शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। चावल का सेवन: एकादशी तिथि पर चावल या चावल से बने पदार्थों का सेवन न करें। दान-पुण्य: अन्न,…

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इतिहास रचने वाली चेज़: जेमिमा और हरमनप्रीत ने भारत को विश्व कप 2025 के फाइनल में पहुँचाया

परिचय ICC महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला, 30 अक्टूबर 2025 को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स अकादमी में खेला गया, जिसे भारतीय महिला टीम ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड चेज़ के साथ जीता। डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 339 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए, भारत ने 5 विकेट से यह मैच अपने नाम किया और पहली बार विश्व कप खिताब जीतने के लिए फाइनल में अपनी जगह पक्की की। यह जीत न केवल ऑस्ट्रेलिया के 16 मैचों के विजय रथ को रोकने वाली थी, बल्कि महिला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (WODI) क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ा सफल रन चेज़ भी थी। ऑस्ट्रेलिया की चुनौती: फीबी लिट्चफील्ड का शतक टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भारतीय गेंदबाजों को कड़ी चुनौती दी। सलामी बल्लेबाज फीबी लिट्चफील्ड ने एक शानदार पारी खेली, जहाँ उन्होंने सिर्फ 93 गेंदों पर 119 रन बनाए, जिसमें 17 चौके और 3 छक्के शामिल थे। उन्हें एलिस पेरी (77 रन) का अच्छा साथ मिला, जिनके साथ उन्होंने 155 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। अंत में, एशले गार्डनर ने 45 गेंदों पर 63 रन की तेज पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया को 49.5 ओवर में 338 रनों के विशाल स्कोर तक पहुँचाया। भारत की ओर से युवा स्पिनर श्री चरणी (2/49) और दीप्ति शर्मा (2/73) ने दो-दो विकेट लिए, लेकिन पिच बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग साबित हुई। जेमिमा रोड्रिग्स का करियर-परिभाषित शतक 339 रनों का पीछा करना किसी भी टीम के लिए पहाड़ चढ़ने जैसा था, खासकर ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ। भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही जब शैफाली वर्मा (10) और स्मृति मंधाना (24) पावरप्ले के भीतर ही पवेलियन लौट गईं। इसके बाद, मुंबई की लोकल गर्ल जेमिमा रोड्रिग्स क्रीज़ पर आईं और उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ मिलकर इतिहास रचने का काम शुरू किया। रोमांचक समापन और जीत जेमिमा ने दीप्ति शर्मा (24) और ऋचा घोष (26) के साथ छोटी लेकिन महत्वपूर्ण साझेदारियाँ निभाईं। ऋचा घोष ने 16 गेंदों पर 26 रन बनाकर रन रेट को नियंत्रण में रखा। अंतिम ओवरों में, अमनजोत कौर ने आकर निर्णायक चौके लगाकर भारत को 48.3 ओवर में ही लक्ष्य तक पहुँचा दिया। यह जीत महिला वनडे क्रिकेट में सर्वोच्च सफल चेज़ का एक नया रिकॉर्ड था, जो भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। इस जीत के साथ, भारत ने फाइनल में अपनी जगह बनाई जहाँ उनका मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से होगा, जो टूर्नामेंट की पहली चैंपियन बनने की दौड़ में हैं। निष्कर्ष जेमिमा रोड्रिग्स की शांत शतक और हरमनप्रीत कौर की साहसी कप्तानी ने भारत को न केवल सेमीफाइनल जिताया, बल्कि सात बार की विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के प्रभुत्व को भी चुनौती दी। यह जीत भारतीय क्रिकेट में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसने करोड़ों प्रशंसकों को फाइनल में इतिहास रचने की उम्मीद दी है। मैच का संक्षिप्त स्कोरकार्ड टीम पारी स्कोर ऑस्ट्रेलिया महिला 49.5 ओवर 338 ऑल आउट (P. Litchfield 119, E. Perry 77; S. Charani 2/49) भारत महिला 48.3 ओवर 341/5 (J. Rodrigues 127*, H. Kaur 89; K. Garth 2/46) परिणाम भारत महिला 5 विकेट से विजयी प्लेयर ऑफ़ द मैच जेमिमा रोड्रिग्स

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