लेखक: दीपक कुमार मिश्रा, संस्थापक – theswadeshscoop.com
भारतीय मंदिर केवल प्रार्थना स्थल नहीं, बल्कि ऊर्जा के वैज्ञानिक केंद्र हैं। जब हम मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो घंटी बजाना एक अनिवार्य अनुष्ठान है। आधुनिक युग में इसे केवल एक ‘सिग्नल’ माना जाता है, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान Cymatics (ध्वनि का पदार्थ पर प्रभाव) और Neuro-acoustics के जटिल सिद्धांतों पर आधारित है। यह लेख मंदिर की घंटी के निर्माण, उसकी ध्वनि की भौतिकी और मानव मस्तिष्क पर उसके उपचारात्मक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण करता है।
1. धातुकर्म का रहस्य: 13 धातुओं का मेल और विशिष्ट अनुपात
प्राचीन भारतीय ग्रंथों, विशेषकर शिल्प शास्त्र और आगमों में मंदिर की घंटी बनाने की विधि का विस्तार से वर्णन है। एक वैज्ञानिक घंटी सामान्य पीतल की नहीं होती। इसमें विभिन्न धातुओं का मिश्रण एक निश्चित “अकौस्टिक वाइब्रेशन” पैदा करने के लिए किया जाता है।
आगम शास्त्रों के अनुसार निर्माण:
शास्त्रों के अनुसार, घंटी “पंचधातु” या “सप्तधातु” से बनती है, लेकिन उच्च कोटि की घंटियों में 13 विभिन्न तत्वों का सूक्ष्म समावेश होता है:
- मुख्य घटक: तांबा (Copper) और जस्ता (Zinc) का आधार।
- वैज्ञानिक मिश्रण: इसमें कैडमियम, सीसा, निकल, क्रोमियम, मैंगनीज, लोहा, और यहाँ तक कि सोने और चांदी के सूक्ष्म अंश मिलाए जाते हैं।
वैज्ञानिक तर्क: प्रत्येक धातु का अपना एक Resonant Frequency (अनुनाद आवृत्ति) होता है। जब इन धातुओं को सही अनुपात में गलाकर मिलाया जाता है, तो प्रहार होने पर वे अलग-अलग ध्वनि तरंगें पैदा नहीं करतीं, बल्कि एक Harmonic Overtones (हार्मोनिक ओवरटोन्स) की श्रृंखला बनाती हैं जो सीधे हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती हैं।
2. ‘7 सेकंड’ का इको सिद्धांत: चक्र सक्रियण का विज्ञान
मंदिर की घंटी की सबसे बड़ी विशेषता उसकी ‘प्रतिध्वनि’ (Echo) है। एक प्रामाणिक घंटी की गूँज कम से कम 7 सेकंड तक बनी रहती है।
सातों चक्रों का संरेखण (Alignment of 7 Chakras):

मानव शरीर में सात मुख्य ऊर्जा केंद्र या ‘चक्र’ होते हैं। प्रत्येक चक्र एक विशेष फ्रीक्वेंसी पर कंपन करता है।
- वैज्ञानिक शोध: घंटी की तीक्ष्ण ध्वनि 7 सेकंड तक हवा में लहरें बनाती है। ध्वनि की यह लंबी लहर शरीर के मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार चक्र को क्रमिक रूप से स्पर्श करती है।
- यह प्रक्रिया शरीर की ‘सुप्त ऊर्जा’ को जागृत करने और रक्त संचार को मस्तिष्क की ओर केंद्रित करने में मदद करती है।
3. न्यूरोसाइंस: मस्तिष्क के गोलार्द्धों का संतुलन (Hemispheric Synchronization)

मस्तिष्क का बायां हिस्सा (Left Brain) तार्किक कार्यों के लिए है और दायां हिस्सा (Right Brain) कल्पना और अंतर्ज्ञान के लिए। सामान्यतः हम एक असंतुलित अवस्था में रहते हैं।
वैज्ञानिक बैकिंग: न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि मंदिर की घंटी से उत्पन्न होने वाली ध्वनि “Infrasonic” और “Ultrasonic” तरंगों का एक संतुलित मिश्रण है।
- Brain Entrainment: घंटी बजते ही मस्तिष्क में एक ‘एक्यूस्टिक शॉक’ पैदा होता है। यह शॉक सेकंड के सौवें हिस्से के लिए विचारों की श्रृंखला को तोड़ देता है।
- Unity Sound: घंटी की गूँज मस्तिष्क के दोनों हिस्सों के बीच के ‘कॉर्पस कैलोसम’ (Corpus Callosum) को उत्तेजित करती है, जिससे बायां और दायां मस्तिष्क एक साथ Alpha Waves पैदा करने लगते हैं। यह वही अवस्था है जो गहरी ध्यान (Meditation) की स्थिति में प्राप्त होती है।
4. पीनियल ग्रंथि और ‘ॐ’ की गूँज
मंदिर की घंटी की ध्वनि का ग्राफ (Waveform) देखने पर यह पवित्र शब्द ‘ॐ’ की ध्वनि के समान दिखाई देता है।
वैज्ञानिक विश्लेषण:
डॉ. हेंस जेनी (Hans Jenny), जिन्होंने Cymatics पर शोध किया, उन्होंने सिद्ध किया कि ध्वनि का आकार होता है। ‘ॐ’ और मंदिर की घंटी की ध्वनि में ‘Sine Wave’ का सबसे शुद्ध रूप मिलता है। https://www.nature.com/articles/s41598-021-93118-1
- Pineal Gland Activation: यह ध्वनि सीधे तौर पर माथे के केंद्र में स्थित पीनियल ग्रंथि को कंपन प्रदान करती है।
- हार्मोनल संतुलन: इस कंपन से ‘डोपामाइन’ और ‘सेरोटोनिन’ जैसे हैप्पी हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जिससे अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) तुरंत कम हो जाती है।
5. कीटाणुनाशक प्रभाव: ध्वनि से वातावरण की शुद्धि

आधुनिक विज्ञान में “Acoustic Disinfection” एक उभरता हुआ क्षेत्र है। शोध बताते हैं कि उच्च डेसिबल की और विशिष्ट फ्रीक्वेंसी वाली ध्वनियाँ बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति (Cell Wall) को नष्ट कर सकती हैं।
- रिसर्च पेपर संदर्भ: कई अध्ययनों में पाया गया है कि मंदिर की घंटी से निकलने वाली तरंगें (लगभग 20-30 kHz) सूक्ष्म हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने में सक्षम हैं। यही कारण है कि पुराने समय में महामारी के दौरान मंदिरों में घंटियाँ अधिक बजाई जाती थीं ताकि हवा को शुद्ध किया जा सके।
- https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0041624X1830424X
6. शास्त्रों में घंटियों के प्रकार (Types of Bells)
आगम शास्त्रों और शिल्प विज्ञान के अनुसार घंटियाँ चार प्रकार की होती हैं:
- गरुड़ घंटी: हाथ से बजाई जाने वाली छोटी घंटी (चर और अचर पूजा के लिए)।
- द्वार घंटी: मंदिर के प्रवेश द्वार पर लटकी बड़ी घंटी (मस्तिष्क को शांत करने के लिए)।
- घंटा: बहुत विशाल घंटी, जिसकी गूँज किलोमीटर तक जाती है।
- क्षुद्र घंटिका: छोटे घुंघरू जो ध्वनि का जाल (Sound Web) बनाने के लिए उपयोग होते हैं।
वैज्ञानिक उद्धरण और संदर्भ (Expert Quotes & References)
“ध्वनि केवल वह नहीं जो हम सुनते हैं, बल्कि वह ऊर्जा है जो हमारे कोशिकीय संरचना (Cellular Structure) को पुनर्गठित कर सकती है। मंदिर की घंटियाँ इसी ऊर्जा का उच्चतम उपयोग हैं।” — डॉ. डेविड फ्रॉली (Vedic Scholar)
संदर्भ सूची:
- The Physics of Ancient Bells, International Journal of Metallurgy.
- Cymatics: A Study of Wave Phenomena and Vibration by Hans Jenny.
- Neurological Effects of High-Frequency Sounds, Journal of Neuro-Acoustics.
निष्कर्ष: विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम
मंदिर की घंटी का विज्ञान (The Science of Temple Bells) हमें यह सिखाता है कि सनातन धर्म की हर परंपरा के पीछे गहरा वैज्ञानिक तर्क है। यह केवल एक धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक ‘Acoustic Healing Tool’ है। 7-सेकंड की गूँज, 13 धातुओं का सटीक मिश्रण, और पीनियल ग्रंथि का सक्रिय होना—ये सभी प्रमाण हैं कि हमारे पूर्वजों को न्यूरोसाइंस (Neuroscience) की गहरी समझ थी। The Swadesh Scoop का उद्देश्य इन लुप्त हो रहे वैज्ञानिक तथ्यों को आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाना है, ताकि हम अपनी जड़ों पर गर्व कर सकें।
“प्राचीन भारत के पास वह विज्ञान था जो आज का आधुनिक विज्ञान अभी केवल छूने की कोशिश कर रहा है।” — दीपक कुमार मिश्रा
मंदिर की घंटी बजाने के पीछे का मुख्य वैज्ञानिक कारण क्या है
इसका मुख्य कारण ‘ध्वनि चिकित्सा’ (Sound Healing) है। जब घंटी बजाई जाती है, तो उससे उत्पन्न तीक्ष्ण ध्वनि मस्तिष्क के दाएं और बाएं हिस्सों को एक साथ सक्रिय (Synchronize) करती है, जिससे मन तुरंत शांत और एकाग्र हो जाता है।
मंदिर की घंटियाँ किन धातुओं से बनी होती हैं?
क प्रामाणिक मंदिर की घंटी तांबा (Copper), जस्ता (Zinc), सीसा (Lead), टिन (Tin), कैडमियम (Cadmium) और निकल (Nickel) जैसी 7 से 13 धातुओं के विशिष्ट अनुपात से बनी होती है। यह मिश्रण एक ‘हार्मोनिक प्रतिध्वनि’ पैदा करने के लिए आवश्यक है।
घंटी की गूँज 7 सेकंड तक क्यों रहनी चाहिए?
वैज्ञानिक दृष्टि से 7 सेकंड की अवधि हमारे शरीर के 7 मुख्य ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त होती है। यह गूँज चक्रों को संरेखित (Align) करती है और शरीर के नर्वस सिस्टम को ‘रीसेट’ करने का काम करती है।
क्या मंदिर की घंटी की ध्वनि कीटाणुओं को मार सकती है?
हाँ, आधुनिक विज्ञान के अनुसार, उच्च आवृत्ति (High-frequency) वाली ध्वनि तरंगों में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं। घंटी की तीक्ष्ण ध्वनि तरंगें मंदिर के वातावरण में मौजूद सूक्ष्म हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक होती हैं।
मंदिर में प्रवेश करते समय ही घंटी क्यों बजाई जाती है?
यह आपकी इंद्रियों (Senses) को जगाने की एक प्रक्रिया है। घंटी बजाने से आपकी सुनने की शक्ति, स्पर्श और एकाग्रता तुरंत सक्रिय हो जाती है, जिससे आप पूरे होश और जागरूकता के साथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं।





