हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफल एकादशी का व्रत रखा जाता है। वर्ष 2025 में यह पावन तिथि आज मनाई जा रही है और इस बार यह व्रत शोभन योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग में पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शोभन योग में किया गया व्रत और पूजा कई गुना फलदायी मानी जाती है।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और विष्णु सहस्रनाम पाठ का आयोजन किया जा रहा है।
सफल एकादशी का धार्मिक महत्व
सफल एकादशी का उल्लेख पद्म पुराण, स्कंद पुराण और विष्णु पुराण https://www.hindupedia.com/en/Vishnu_Purana में मिलता है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से:
- जीवन में चल रही असफलताएं दूर होती हैं
- पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है
- आर्थिक परेशानियां कम होती हैं
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक सफल एकादशी का व्रत करता है, उसे राजसूय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।
शोभन योग का विशेष महत्व
इस वर्ष सफल एकादशी शोभन योग में मनाई जा रही है। ज्योतिष शास्त्र में शोभन योग को:
- सफलता देने वाला
- मान-सम्मान बढ़ाने वाला
- कार्यों में शुभ परिणाम देने वाला
माना गया है। इस योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से करियर, व्यापार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।
सफल एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त
(स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है)
- एकादशी तिथि आरंभ: प्रातः
- एकादशी तिथि समाप्त: अगले दिन प्रातः
- पूजा का श्रेष्ठ समय:
- प्रातः 6:00 बजे से 10:30 बजे तक
- पारण (व्रत खोलने) का समय:
- द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद
सफल एकादशी पूजा विधि (Step-by-Step)
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- पीले फूल, तुलसी दल, दीपक और धूप अर्पित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें
- दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखें (स्वास्थ्य अनुसार)
- रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करें
सफल एकादशी व्रत कथा (संक्षेप में)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में चंपावती नगरी के राजा माहिष्मत के पुत्र लुंबक अत्यंत दुराचारी थे। अपने कर्मों के कारण उन्हें वन में निर्वासित होना पड़ा। वहां उन्होंने पौष कृष्ण एकादशी का व्रत अनजाने में रखा।
भगवान विष्णु की कृपा से उनके सारे पाप नष्ट हो गए और वे पुनः राजा बने। तभी से यह एकादशी “सफल एकादशी” कहलाने लगी, क्योंकि यह असफल व्यक्ति को भी सफलता प्रदान करती है।
मंदिरों में विशेष आयोजन
छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में:
- विष्णु मंदिरों में विशेष अभिषेक
- तुलसी विवाह की तैयारी
- भजन-कीर्तन और प्रवचन
- गरीबों को अन्न-वस्त्र दान
जैसे आयोजन किए जा रहे हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।https://www.hindupedia.com/en/Saphala_Ekadashi
सफल एकादशी पर क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- सात्विक भोजन या फलाहार
- सत्य और संयम का पालन
- दान-पुण्य
क्या न करें
- तामसिक भोजन
- क्रोध, झूठ और निंदा
- बाल और नाखून काटना
सफल एकादशी का आध्यात्मिक संदेश
सफल एकादशी हमें यह सिखाती है कि:
“सच्ची श्रद्धा और आत्मसंयम से हर असफलता को सफलता में बदला जा सकता है।”
यह व्रत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मविकास का भी मार्ग है।
निष्कर्ष
सफल एकादशी 2025 का यह शुभ अवसर शोभन योग के कारण और भी विशेष बन गया है। यदि आप जीवन में लंबे समय से संघर्ष, रुकावट या असफलता का सामना कर रहे हैं, तो श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत नई दिशा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
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