8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की प्रक्रिया शुरू! केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज़। कैबिनेट ने 8th Pay Commission के ToR को मंज़ूरी दी। जानें- कब बढ़ेगी सैलरी, क्या है नया फिटमेंट फैक्टर।केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission – CPC) के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR)’ को मंज़ूरी दे दी है। इस मंज़ूरी के साथ ही 1 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में बदलाव की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है।https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/8th-pay-commission-good-news-for-central-government-employees-terms-of-reference-approved-by-pm-modi-led-cabinet-check-details/articleshow/124869903.cms
1. 8वें वेतन आयोग से जुड़ी मुख्य घोषणाएं

| विवरण | जानकारी |
| मंज़ूरी की तारीख | 28 अक्टूबर, 2025 (कैबिनेट द्वारा ToR को मंज़ूरी) |
| लागू होने की संभावित तारीख | 1 जनवरी, 2026 (10 साल के चक्र के अनुसार) |
| लाभार्थी | लगभग 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनभोगी। |
| आयोग के अध्यक्ष | सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई। |
| अन्य सदस्य | प्रोफेसर पुलक घोष (अंशकालिक सदस्य) और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन (सदस्य-सचिव)। |
| सिफारिशें जमा करने की समय सीमा | आयोग को अपनी रिपोर्ट स्थापित होने की तारीख से 18 महीने के भीतर देनी होगी। |
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि नई वेतन संरचना 1 जनवरी, 2026 से लागू हो सकती है, और कर्मचारियों को इस तारीख से एरियर (Arrears) का भुगतान किया जाएगा, भले ही रिपोर्ट बाद में आए।
2. आयोग के कार्यक्षेत्र (Terms of Reference – ToR) और उद्देश्य
8वां वेतन आयोग एक अस्थायी निकाय के रूप में काम करेगा। ToR आयोग के काम की रूपरेखा तय करता है। आयोग को अपनी सिफारिशें देते समय निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करना होगा:
- देश की आर्थिक स्थिति और वित्तीय अनुशासन: सिफारिशों का देश की अर्थव्यवस्था और सरकार के खजाने पर क्या असर पड़ेगा।
- विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन: यह सुनिश्चित करना कि वेतन वृद्धि के बाद भी विकास और जनकल्याण पर खर्च के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें।
- राज्य सरकारों पर प्रभाव: चूंकि राज्य सरकारें भी अक्सर केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अपनाती हैं, इसलिए राज्यों के वित्त पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का आकलन करना।
- निजी क्षेत्र और सार्वजनिक उपक्रमों से तुलना: केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, लाभ और काम करने की स्थितियों की तुलना केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों से करना ताकि सरकारी सेवाओं में प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सके।
3. कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए संभावित लाभ (अपेक्षित वृद्धि)
कर्मचारी संगठन और विशेषज्ञ 8वें वेतन आयोग से बड़ी वेतन वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। पिछले वेतन आयोगों के पैटर्न को देखते हुए, कुछ बड़े बदलावों की संभावना है:
A. वेतन वृद्धि और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor)
- बड़ी सैलरी हाइक की उम्मीद: विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8वां वेतन आयोग 30% से 34% तक की वेतन वृद्धि की सिफारिश कर सकता है।
- नया फिटमेंट फैक्टर: फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसका उपयोग मौजूदा मूल वेतन (Basic Pay) को नए वेतनमान में लाने के लिए किया जाता है।
- 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था।
- 8वें वेतन आयोग में यह 2.28 से 3.00 के बीच रहने का अनुमान है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) में बड़ी छलांग आ सकती है।
- न्यूनतम मूल वेतन में वृद्धि: वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 प्रति माह है। यदि फिटमेंट फैक्टर को 2.28 पर भी सेट किया जाता है, तो यह बढ़कर ₹41,000 तक जा सकता है (हालांकि कुछ अधिक रूढ़िवादी अनुमान इसे ₹21,600 तक मानते हैं)।
| वर्तमान मूल वेतन (7वां CPC) | फिटमेंट फैक्टर (2.28 अनुमानित) | नया संभावित मूल वेतन |
| ₹18,000 (लेवल 1) | 2.28 | ₹41,040 |
| ₹2,50,000 (लेवल 18) | 2.28 | ₹5,70,000 |
B. महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन पर प्रभाव
- DA का मर्जर (विलय): 8वां वेतन आयोग लागू होते ही महंगाई भत्ता (DA) शून्य हो जाएगा और इसे कर्मचारी के नए मूल वेतन में विलय कर दिया जाएगा।
- न्यूनतम पेंशन की मांग: पेंशनभोगी संगठनों ने न्यूनतम मूल पेंशन को ₹9,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मांग की है।
- पेंशन पात्रता में बदलाव की मांग: पूर्ण पेंशन के लिए सेवा की अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 12 वर्ष करने की मांग पर भी विचार किया जा सकता है।
यह मंज़ूरी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नए दशक की शुरुआत में एक बड़ा आर्थिक संबल प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करती है। अब सबकी निगाहें जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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